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    Home»झारखण्ड»इलेक्ट्रॉनिक लाइट्स के आने के वजह से दिपावली में मिट्टी के दिये का घटता जा रहा है महत्त्व
    झारखण्ड

    इलेक्ट्रॉनिक लाइट्स के आने के वजह से दिपावली में मिट्टी के दिये का घटता जा रहा है महत्त्व

    Koylanchal SamvadBy Koylanchal SamvadNovember 4, 2020Updated:November 4, 2020No Comments2 Mins Read
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    वर्तमान में लोग जहां इलेक्ट्रॉनिक लाइट्स और चाइनीज आर्टिफिशियल दिये आदि पसंद कर रहे हैं । वही पारंपरिक मिट्टी के दिये सस्ते तथा शुद्ध माना जाता है। धार्मिक मान्यता होने से इसकी बिक्री अच्छी है। आज भी धार्मिक कार्य में भी मिट्टी के दीये को प्राथमिकता दी जाती है । ऐसे में उन गरीब लोगों के मन में आस जग जाती है जिनकी दीपाली हर साल काली हो जाया करती थी। दीपावली आने में बस कुछ ही दिन बाकी है। लेकिन इस बार कुम्हार कोविड-19 महामारी के वजह से दिये के आर्डर नहीं मिलने से परेशान है खसकर शहर के कुम्हारों को पिछले साल से कम ही ऑर्डर मिले हैं।

    पूरा परिवार मिलकर तैयार करते हैं मिट्टी के दिये: कुम्हार टोली पथलकुड़वा रोड स्थित कुम्हार‌ कमलेश प्रजापति ने बताया कि हमारा पूरा परिवार दीपाली के आते ही मिट्टी के दीये बनाने में हाथ बटांते हैं। कोई मिट्टी गूंथने में तो कोई चाक पर आकार देने में। हमारा पूरा परिवार दिन रात मेहनत कर के एक दिन में सैकड़ों दिये तैयार कर लेते हैं। फिर भी लोग रंग-बिरंगा आर्टिफिशियल दिये लेते हैं, लोग मिट्टी के दीए का उपयोग महज पूजन के ही लिए लेते हैं। इस वर्षआर्थिक मंदी को देखते हुए मिट्टी के खिलौने भी नहीं बना रहे हैं।

    कुम्हार विनोद काशी के परिवार का कहना है कि इस वर्ष मिट्टी के दिये का आर्डर न मिलने से और दिये की कम खरीद पर हमारा परिवार पर रोजी-रोटी का संकट आ पड़ा है हमारे पूरे परिवार के रोजी रोटीका यही एक साधन है। कुछ कुम्हारों के परिवार का कहना है किअगर ऐसा ही हालत आगे भी चलता रहातो हमें यह काम को छोड़ने की कगार पर है ।

    देहात मिट्टी के दीये की है मांग: कुम्हार कमेश कहते हैं कि शहर के लोग ज्यादातर देहात के मिट्टी से बने दिये की मांग करते हैं जो कि दूर से मिट्टी लाना होता है औरमहंगी लकड़ी खरीद कर दिए को पकाने में जो खर्च आता है उससे हमारी आमदनी लगातार घट रही है और पहले की तुलना में अब मिट्टीकी कीमत भी बढ़ गई है। वहीं दूसरी ओर मिट्टी से बनी ग्वालिन दिये की लोगों में खूब मांग हैं। उसकी कीमत ₹40 से लेकर ₹60 तक की है ।

    दीपावली के मनाने का तरीका है बदला: वक्त के साथ ही त्यौहार मनाने का तरीका भी बदल गया है। युवा टरेंड के साथ मिट्टी के दीये के जगह रंग-बिरंगे मोमबत्ती औरआर्टिफिशियल दिये लेने लगे हैं ।

    लेकिन इसका प्रभाव उन घरों पर पड़ता है जो दिन रात एक कर मिट्टी के दीये को तैयार करते हैं और उनके रोज़ी-रोटी का साधन यही है।

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