झारखंड के साहिबगंज जिले के डेयरी प्लांट में एक अक्टूबर से दूध का कलेक्शन शुरू गया है. दूध कलेक्शन के लिए जिले के प्रखण्डों में समिति का गठन किया गया है. वहीं दूध सेंटर में ऑटोमेटिक दूध जांच की सुविधा है, जिससे दूध देने वाले किसानों का दूध किस क्वालिटी का है इसकी जांच होगी और दूध की क्वालिटी के हिसाब से ही दुग्ध उत्पादकों को पेमेंट किया जाएगा. वहीं डेयरी प्लांट में दीपावली से पहले प्रोडक्शन का कार्य शुरू हो जाएगा. युद्ध स्तर पर डेयरी प्लांट में मशीन स्थापित करने का कार्य किया जा रहा है. तीन शिफ्ट में 24 घण्टे कर्मी मशीन स्थापित करने का कार्य कर रहे हैं.
साहिबगंज जिले में 50 हजार लीटर क्षमता वाले डेयरी प्लांट का भवन सदर प्रखंड के महादेवगंज गौशाला के समीप बनकर तैयार है. प्लांट में 90 फीसदी मशीन स्थापित हो चुकी है. शेष मशीनें अक्टूबर तक स्थापित हो जायेंगी. डेयरी प्लांट का भवन बनकर तैयार है. डेयरी प्लांट का प्रोडक्शन नवंबर माह से शुरू होगा. डेयरी प्लांट की आधारशिला पीएम मोदी ने अप्रैल 2017 में रखी थी. 34 करोड़ की लागत से इसका निर्माण किया जा रहा है. इसकी तय समय सीमा दिसंबर 2020 थी, लेकिन कोरोना और फंड के अभाव में बीच में कार्य बाधित रहा था. डेयरी प्लांट का भवन निर्माण पूर्ण है और प्लांट में मशीन को स्थापित करने का कार्य भी युद्ध गति से चल रहा है. मशीन प्लांट में 90 फीसदी तक पहुंच गयी है. शेष जल्द स्थापित कर दिया जाएगा और नवम्बर माह तक प्लांट में प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा. डेयरी प्लांट का कैपिसिटी एक दिन में 50 हजार लीटर का है और अधिकतम एक लाख किया जा सकता है. मेधा डेयरी ब्रांड के नाम से बाजार में प्रोडक्ट आयेगा. आपको बता दें कि डेयरी प्लांट कार्य की प्रगति रिपोर्ट पीएमओ द्वारा सप्ताह पन्द्रह दिनों में ली जाती है.
झारखंड का इकलौता जिला साहिबगंज है, जहां मां गंगा की अविरल निर्मल धारा बहती है. वहीं मां गंगा की नगरी प्रदेश का एकलौता जिला है, जहां वृहद पैमाने पर दुग्ध का उत्पादन होता है. दियारा क्षेत्र से लेकर शहरी व पहाड़ी क्षेत्रों और ग्रामीण क्षेत्रो में वृहद पैमाने पर गौ पालन करके दुग्ध उत्पादन किया जाता है. यहां दुग्ध का बाजार नहीं रहने से मवेशी पालकों को दुग्ध का सही दाम नहीं मिल पाता है, डेयरी प्लांट शुरू हो जाने से पशुपालक दुग्ध को डेयरी प्लांट में बेच सकेंगे. जिससे उन्हें उचित कीमत मिलेगी.
कुछ गांव व पंचायत मिलाकर संबंधित कम्पनी कलेक्शन सेंटर बनाई है. जहां से दुग्ध उत्पादक किसान उस जगह आकर अपना दुग्ध देंगे. वहीं पर दूध की क्वालिटी की जांच ऑनलाइन होगी. किसानों को डेयरी प्लांट अपना दुग्ध बेचने नहीं आना होगा. संबंधित कम्पनी उनसे सम्बंधित कलेक्शन सेंटर में ही दूध खरीद लेगी. वहीं दुग्ध को कलेक्शन सेंटर से प्लांट तक लाने के लिए रूट चार्ट भी बना लिया गया है. दुग्ध के टैंकर की मदद से कलेक्शन सेंटर से दूध डेयरी प्लांट पहुंचेगा. जहां धर्मकांटा के जरिये दूध माप होने के बाद टैंकर के माध्यम से ही देवघर जाएगा. नवम्बर माह से प्रोडक्शन स्टार्ट होने के बाद यहां का दूध यहीं पर पैकिंग होगा और पनीर, दूध, मट्ठा, लस्सी इत्यादि बनेगा.
डेयरी प्लांट में बिजली कनेक्शन करने के लिए विद्युत विभाग में अप्लाई किया गया है. डेयरी प्लांट में किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए एक अलग से क्लासरूम बनाया गया है, जहां जिले के किसानों को दुग्ध उत्पादन कैसे करना है, उसके टिप्स और ज्यादा से ज्यादा दुग्ध उत्पादन से जुड़कर आय दुगनी करने और कैसे ज्यादा से ज्यादा दूध उत्पादन करें, इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा. गव्य विकास द्वारा दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों के बीच गाय उपलब्ध करायी जायेगी, ताकि उनकी आय दोगुनी हो सके. डेयरी प्लांट में सैकड़ों लोगो को रोजगार मिलेगा और हजारों किसान इससे जुड़कर अपनी आय को दोगुना कर सकेंगे.

