रांची: सरला बिरला विश्वविद्यालय रांची के मानविकी और भाषा विज्ञान संकाय, भारतीय महिला दार्शनिक परिषद तथा वेदांत रिसर्च सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में वेदांत के समग्र चिंतन थीम पर तीन दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस का विधिवत शुभारंभ आज बी के बिरला ऑडिटोरियम में हुआ। उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रोफेसर रमेश चंद्र सिंहा, विशिष्ट अतिथि कोल्हान विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डॉ शुक्ला मोहंती, न्यूरो सर्जन डॉ एच.पी नारायण, कुलपति प्रोफ़ेसर गोपाल पाठक, कुलसचिव डॉ विजय कुमार सिंह, डॉ नीलिमा पाठक, डॉ छाया राय, डॉ राजकुमारी सिंहा, डॉ पंपा सेन विश्वास द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।
नेशनल कांफ्रेंस के मुख्य अतिथि डॉ आर सी सिन्हा ने समग्र वेदांत की चर्चा करते हुए भारतीय दर्शन की अवधारणा पर प्रकाश डाला। 21वीं शताब्दी में वेदांत के महत्व एवं उपयोगिता पर ध्यान केंद्रित कराते हुए कहा कि भारतीय दर्शन, सनातन परंपरा की विशेषताओं व समग्र चिंतन के बल पर भारत ने दुनिया को वेदान्त से परिचित कराया।
व्यवहारिक रूप से वेदान्त ही सनातन धर्म ग्रंथ है। जितने भी आस्तिक दर्शन हैं सभी इसी को अपना आधार मानते हैं।
समस्त पुराने अंधविश्वासों को हटा देने के लिए हमें तर्क बुद्धि की आवश्यकता है, और अंत में जो बचा रहता है वही वेदांत है।
वेदान्त वह विशाल सागर है जिसके वक्ष पर युद्धपोत और साधारण बेड़ा दोनों पास पास रह सकते हैं। वेदांत में यथार्थ योगी, मूर्तिपूजक, नास्तिक इन सभी के लिए पास पास रहने का स्थान है। इतना ही नहीं वेदान्त सागर में हिंदू, मुसलमान, ईसाई या फारसी सभी एक हैं- सभी उस सर्वशक्तिमान परमात्मा के संतान हैं।
विशिष्ट अतिथि कोल्हान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ शुक्ला मोहंती ने नारी सशक्तिकरण एवं नारी सम्मान को आज की सामाजिक आवश्यकता बताया।
डॉ. एच.पी नारायण ने अपने संबोधन में जोहार शब्द का प्रयोग करते हुए कई प्राचीन दृष्टांतों एवं उदाहरणों के द्वारा वेदांत के विचारों से परिचित कराया। उन्होने कहा कि वेदांत समस्त वेदों का सार है। अभी तक जो जाना जा सका है तथा भविष्य में जो जाना जाएगा, दोनों का समन्वित ज्ञान ही वेदांत है। वेदांत एक जीवन दर्शन है। उन्होंने कहा कि भारत का अर्थ ही सनातन है एवं सनातन का मूल ही वेदांत है।
कांफ्रेंस की ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ नीलिमा पाठक ने गीता में वर्णित विभिन्न योगों के संगम को ही वेदांत कहा। विश्व में बढ़ रही धार्मिक उन्माद के निदान के लिए वेद की ओर लौटने की आवश्यकता है। हमें आत्म समर्थ बनने के लिए कर्मवाद की ओर बढ़ना होगा। उन्होंने नित्य, नैमित्तिक कर्म की विशद व्याख्या करते हुए कहा कि न्यायोचित एवं कल्याणकारी कर्म की प्रेरणा श्रीमद्भागवत गीता से प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता एवं भौतिकता की दौड़ से हटकर वास्तविक जीवन का आनंद तपस्या पूर्वक जीने में है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो गोपाल पाठक ने अतिथियों का स्वागत करते हुए वैदिक कालीन परंपराओं एवं एवं दर्शन की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वेदांत ज्ञानयोग की एक शाखा है जो व्यक्ति को ज्ञान प्राप्ति की दिशा में उत्प्रेरित करता है।
वेदान्त ही हमें परमात्मा से साक्षात्कार करवाता है। सरला बिरला विश्वविद्यालय की ओर से वेदांत के क्षेत्र में अनवरत कार्य करने वाले डॉ एच.पी नारायण को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रोफ़ेसर गोपाल पाठक द्वारा प्रदान किया गया तथा उनका विस्तृत परिचय विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ विजय कुमार सिंह ने कराया।
कुलसचिव डॉ विजय कुमार सिंह ने कहा कि आगामी सत्र से सरला बिरला विश्वविद्यालय में वेदान्त रिसर्च सेंटर की स्थापना की जाएगी जिससे यहां के छात्रों को भारतीय जीवन दर्शन से परिचित कराया सके ताकि उनका भावी जीवन आध्यात्मिक बन सके।
कार्यक्रम में मंच का मानविकी की सहायक प्राध्यापक डॉ रिया मुखर्जी ने किया
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी पदाधिकारी, संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापकगण, छात्र छात्राएं एवं महिला दार्शनिक परिषद तथा वेदान्त रिसर्च सेंटर के सदस्यगण उपस्थित थे।

