रांची: अपर न्यायायुक्त विशाल श्रीवास्तव की अदालत ने पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को चिरूडीह उत्खनन कार्य में बाधा डालने, सरकार कार्य में बाधा डालने समेत अन्य आरोपों से साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। अदालत ने पूर्व विधायक निर्मला देवी एवं सहयोगी मंटू सोनी को दोषी करार देते हुए एक महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई है।
धारा 341 के तहत कोर्ट ने सजा सुनाई
अदालत ने इन दोनों को भादवि की धारा 341 (किसी व्यक्ति को गलत तरीके से रोकना) के तहत सजा सुनाई है। एनटीपीसी कंपनी की ओर से 29 सितंबर 2016 को चिरूडीह में उत्खनन कार्य किया जा रहा था। पूर्व विधायक निर्मला देवी अपनी समर्थकों के साथ उत्खनन कार्य में बाधा डाला गया।
वर्ष 2016 में बड़कागांव थाने में प्राथमिकी हुई थी दर्ज
घटना को लेकर 30 सितंबर 2016 को बड़कागांव थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। हालांकि प्राथमिकी में योगेंद्र साव का नाम नहीं था। इस मामले में वर्ष 2019 से ही बचाव पक्ष की गवाही पर चल रहा थी। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल सात गवाही दर्ज कराई गई थी। सुनवाई के दौरान योगेंद्र साव को जेल से वीडियो काफ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया था।

