रांची: राजकीय कृषि प्रक्षेत्रों में समेकित बिरसा विकास योजना तहत कृषक पाठशाला एवं बिरसा ग्राम विकसित करने की योजना पर राज्य सरकार ने कार्य शुरू कर दिया है. राज्य योजनान्तर्गत चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए कृषि क्षेत्र में फसल उत्पादन एवं उत्पादकता को बढ़ाने एवं उन्नत कृषि प्रौद्योगिकी को प्रदर्शित करने के लिए सरकार ने ये योजना शुरू की है.
यह है उद्देश्य
कृषक पाठशाला के माध्यम से कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य विभाग द्वारा कृषकों को क्षमता विकास एवं प्रत्यक्षण पर वैज्ञानिक विधि से प्रशिक्षित किया जाएगा. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग तथा सरकार के अन्य विभागों के बीच योजनाओं का लक्षित अभिसरण तय किया गया है.
7 उसमें क्लस्टर आधारित बिरसा गांव में मलचिंग तकनीक द्वारा सिंचाई सुविधा विकसित करना, फॉरवर्ड लिंकेज सेवा के माध्यम से लाभुक कृषकों को आर्थिक सुदृढीकरण प्रदान करना है. साथ ही फसल की कटनी के उपरांत आधारभूत संरचना उपलब्ध कराना है, ताकि उत्पाद को सुरक्षित रखा जा सके.
राज्य के विभिन्न कृषि प्रक्षेत्रों में 17 कृषक पाठशाला विकसित किये जायेंगे:
समेकित बिरसा विकास योजना के मॉडल के पहले चरण में 17 कृषक पाठशाला राज्य के विभिन्न कृषि प्रक्षेत्रों में विकसित की जाएगी. फिर अगले तीन वर्षों में चरणबद्ध तरीके से 100 कृषक पाठशाला विकसित की जाएगी. प्रत्येक कृषक पाठशाला में 3 से 5 बिरसा गांव को क्लस्टर एप्रोच के अन्तर्गत आच्छादित किया जाएगा.
कृषक पाठशाला में बिरसा गांव के किसानों को 50 -100 किसान प्रति गांव क्षमता विकास कर प्रशिक्षण एवं टिकाऊ खेती के बारे में वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षित किया जाएगा. उत्पादित वस्तुओं को कृषक पाठशाला के माध्यम से सप्लाई चेन, कस्टम हयरिंग सेंटर एवं मार्केट लिंकेज की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी. सरकार द्वारा संचालित सभी योजनाओं का अभिषरण किया जाएगा.
क्लस्टर आधारित मलचिंग सुविधा, ड्रीप एरिगेशन, बॉवेल, रोड, डिलिवरी पाईप, समरसेबुल पम्प, कैरेट एवं अन्य स्टोरेज सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी.
इस कार्य में इनकी रहेगी भूमिका:
कृषि निदेशालय द्वारा तीन वर्षों के लिए कृषि, उद्यान, पशुपालन एवं मत्स्य से संबंधित विशेषज्ञ एजेन्सी को सूचीबद्ध किया जाएगा. साथ ही कृषि निदेशालय द्वारा तीन वर्षों के लिए 3-4 सदस्यीय राज्य स्तर पर पीएमयू का गठन किया जाएगा. कार्यकारी एजेन्सी एवं गठित पीएमयू को कार्य एवं दायित्व दिया जाएगा.
सफलता पूर्वक कृषक पाठशाला की स्थापना के लिए विभिन्न प्रकार के कार्य एवं प्रत्यक्षण जो कृषि, पशुधन एवं मत्स्य इत्यादि से संबंधित होगा, उसे एजेन्सियों के द्वारा सम्पादित किया जाएगा.
पीएमयू के ये होंगे कार्य:
कृषि निदेशालय तीन वर्षों के लिए 3-4 सदस्यीय राज्य स्तर पर पीएमयू का गठन करेगा. जो सभी योजनाओं का प्रबंधन एवं अनुश्रवण में सहयोग,कार्यकारी संस्थाओं की पहचान एवं उनके कार्य में सहयोग करेगा.
कार्यकारी संस्थाओं के साथ सहयोग कर प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं प्रशिक्षण सामग्री, कृषि उत्पाद के लिए मार्केट लिंकेज की व्यवस्था, सभी योजनाओं हेतु रोड मैप, कार्य योजना एवं रणनीति, सभी निदेशालयों एवं विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर ससमय क्रियान्वयन करने का कसम होगा.

