गोड्डा: जिला जज तृतीय के न्यायालय ने हत्या के आरोप में दोषी पाकर ललमटिया थाना क्षेत्र के गोरखपुर निवासी फिरोज अंसारी एवं सहवान अंसारी को आजीवन कारावास व 25-25 हजार रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं भरने पर छह माह अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी होगी। इसी मामले में तीन आरोपित रईस अंसारी, जहीर अंसारी एवं जहांगीर अंसारी को दोषमुक्त करार देते हुए रिहा कर दिया गया।
घटना को लेकर दर्ज मामले में बोआरीजोर प्रखंड अंतर्गत ललमटिया थाना क्षेत्र के गोरखपुर गांव निवासी यारुन अंसारी ने कहा है कि 23 अप्रैल 2010 को रात सात बजे वह अपने सातों भाइयों के साथ बेटी की शादी के संबंध में बातचीत कर रहे थे। उसी समय गांव के ही सलाउद्दीन अंसारी ने आकर कहा कि सरदार ने पंचायती के लिए बुलाया है। उन्होंने यह कहकर जाने से मना कर दिया कि उसका दो भाई रफीक व करीम जलसा में गया है, इसलिए बैठक कल सुबह होगी। सलाउद़्दीन अंसारी के साथ ही उसका छोटा भाई महीबूल अंसारी चला गया। तब तक रईस अंसारी भी आ गया और उसके भाई महीबूल अंसारी को देना किस्कू के बारी में ले गया। इसके बाद जान मारने की नियत से पीठ में गोली मार दी। उसके चिल्लाने पर वे लोग एवं गांव के लोग भी दौड़कर वहां गए। सभी को टार्च की रोशनी में देखा तो इसके बाद अंधाधुंध फायरिग शुरू कर दी। इसमें सलीम अंसारी को गोली लगने से उसकी मृत्यु घटनास्थल पर ही हो गई, जबकि महबूल अंसारी, उताउल अंसारी एवं सिराजुद्दीन अंसारी घायल हो गया। विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से पीपी प्रदीप कुमार दास ने न्यायालय के समक्ष आठ गवाहों का परीक्षण कराया। उभय पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत दो आरोपित फिरोज अंसारी एवं सहवान असारी को 302 के तहत आजीवन कारावास, 148 के तहत एक वर्ष, 307 के तहत दस वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई। सभी सजा साथ-साथ चलेगी।

