रांची में सर-ए-आम सरकार के आदेश की धज्जियां उड़ाई जा रही है। लापरवाही का यह आलम उस रोज हुआ है जिस दिन यहां कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन की पुष्टी हुई है। एक तरफ सरकार राज्य में मेला प्रदर्शन और जुलूस पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा करती है तो दूसरी तरफ राजधानी के लोग ही इसे धत्ता बता रहे हैं।
रांची के सिल्ली प्रखंड में न केवल हरिहर घाट में पूस मेला(हरिरल मेला) का आयोजन किया गया। बल्कि इसमें हजारों की संख्या में लोग जुटे। कोरोना पर जारी सरकार के हर गाइडलाइन को पैरों से मसला गया। यहां दुकाने सजी, नुक्कड़-नाटक दिखाया गया। मच सजा। नाच-बचाना हुआ। इन सब के बीच जो नहीं बचा वो था सोशल डिस्टेंसिंग। मेले में आए 90 फीसदी से ज्यादा ग्रामीणों के चेहरे पर न मास्क था और न ही कहीं सेनेटाइजर की व्यवस्था की गई थी।
मुर्गा लड़ाई से पैसा डबल करो के आयोजन हुए
मेले में खाने पीने की दर्जनों दुकानें, स्टेशनरी, कपड़े, सब्जियां, ईख, ठेले, टैटू स्टूडियो, खिलौने की दुकानें समेत सैकड़ों दुकानें लगाई गई। पैसा फेंको डबल करो के खेल, झंडी मुंडी, मुर्गा लड़ाई समेत सभी प्रकार के आयोजन धड़ल्ले से किए गए।
मेले में कहीं नहीं दिखा प्रशासन
इस पूरे आयोजन में प्रशासन की मौन रही। इतनी भीड़ शाम तक रही। लेकिन उनको हटाने या रोकने के लिये कोई भी मौजूद नहीं था। आयोजन स्थल पर बैठे लोगों से यह पूछा गया कि मनाही के बाद भी सतह पर माइक क्यों लगाया तो उन्होंने कहा कि मेला मे किस गाव के कितने लोग आये है कोई खो जाए तो उनकी अनाउंस करके मदद करने के लिये साउंड सिस्टम लगाया गया है। इस दौरान प्रशासन की खूब धज्जियां उड़ाई गई।
प्रशासन ने कहा-भीड़ स्वत: जमा हो गई थी
वहीं इस मामले में सिल्ली के इंसीडेंट कमांडर पवन लकड़ा ने दैनिक भास्कर को बताया कि भीड़ स्वत: जमा हो गई थी। मेले में दुकान लगाने वाले कार्रवाई होगी। सभी की सूची तैयार की जा रही है ।

