धनबा: धनबाद के कोयला कारोबारी प्रमोद सिंह की हत्या में सीबीआइ की विशेष अदालत ने शुक्रवार को अुपना फैसला सुनाया। न्यायाधीश रजनीकांत पाठक की अदालत ने कांड के आरोपित रणविजय सिंह, संतोष सिंह, अयूब खान, दारोगा एमपी खरवार, अरशद अली और हीरा खान को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रमोद सिंह की हत्या हुई पर किसने कराई और किसने की, सीबीआई यह साबित नहीं कर पाई। करीब आधे घंटे तक चली सुनवाई के दौरान न्यायाधीश पाठक ने आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए सभी आरोपों को पढ़कर बताया कि किनके विरुद्ध क्या आरोप थे और सीबीआई को क्या साबित करना था ? जिसे साबित करने में सीबीआई विफल हो गई
सिर्फ संदेह के आधार पर सीबीआइ ने लगाए आरोप
सीबीआई ने संदेह के सभी आरोप लगाया था। लेकिन संदेश पर साबित नहीं कर पाई। केवल डॉक्टर डी मिश्रा का यह बयान कि उनके अनुमति के बिना प्रमोद सिंह का हस्ताक्षर ले लिया गया था, इसके आधार पर किसी आरोपी को हत्या जैसे संगीन अपराध में दोषी नहीं ठहराया जा सकता। बचाव पक्ष की ओर से वरीय अधिवक्ता शाहनवाज, हुसैन हैकल, मो रफीक, विकास कुमार वर्मन, सहदेव महतो एवं पीके घोषाल ने पैरवी की।
घर के दहलिज पर मारी गई थी गोली
कोयला कारोबारी प्रमोद सिंह की हत्या तीन अक्टूबर 2003 को धनसार स्थित बीएम अग्रवाला कालोनी में गोली मारकर कर दी गई थी। प्रमोद सिंह के कथित बयान पर धनसार थाने में प्राथमिकीदर्ज हुई थी। इस हत्याकांड के बाद अंडरवर्ल्ड में सनसनी फैल गई थी। प्राथमिकी में जनता मजदूर संघ के नेता रामधीर सिंह और राजीव रंजन को अभियुक्त बनाया गया था। बाद में अनुसंधान का जिम्मा सीबीआइ को सौंपा गया था। सीबीआइ की जांच में पुलिस की कहानी धवस्त हो गई थी।
सीबीआइ ने सुरेश, संतोष और रणविजय को बनाया था मुख्य षडयंत्रकारी
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में पुलिस की सारी कहानी को ध्वस्त करते हुए कांड के नामजद आरोपी रामधीन सिंह एवं राजीव रंजन सिंह को क्लीन चिट दे दिया था। जबकि पुलिस प्राथमिकी के गवाह सुरेश सिंह ,रणविजय सिंह संतोष सिंह ,एवं अरशद अयूब ,सैयद मोहम्मद अख्तर उर्फ खड़ग सिंह, हीरा खान, कश्मीरी खान एवं सरायढेला थाना प्रभारी मदन प्रसाद खरवार को अभियुक्त बनाते हुए चार्ज शीट अदालत में समर्पित की थी । सीबीआई ने सुरेश सिंह रणविजय सिंह एवं संतोष सिंह को प्रमोद की हत्या का मुख्य षड्यंत्रकारी बताया था । सीबीआई ने दावा किया था कि सब-इंस्पेक्टर एम पी खरवार की मदद से, सुरेश, रनविजय, संतोष सिंह ने प्रमोद कुमार के अपने दो व्यापारिक प्रतिद्वंद्वियों – रमाधीन सिंह और राजीव रंजन सिंह को हमलावरों के रूप में बताते हुए एक मृत्युकालीन बयान तैयार करवाया था। सुनवाई के दौरान सुरेश सिंह, खड़ग सिंह और कश्मीरा खान की मौत हो चुकी है।

