रांची: रूस के हमले के बाद यूक्रेन में सबसे अधिक समस्या वहां पढ़ने गए छात्रों को हो रही है। झारखंड से ही करीब दो हजार छात्र यूक्रेन में फंसे हुए हैं, जिसके बाद अब वे वहां से निकलने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अधिकतर छात्र वहां मेडिकल की पढ़ाई करने गए हुए हैं, जिस यूनिवर्सिटी में वे पढ़ाई कर रहे हैं वहां की यूनिवर्सिटी ने क्लास एबसेंट करने पर छात्रों का रजिस्ट्रेशन रद करने की बात कर रहा है। जिसके बाद फंसे हुए छात्रों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
छात्रों ने बताया कि इस बीच हवाई टिकट इस तरह से महंगी कर दी गई थी कि हर छात्रों के लिए यह तुरंत संभव नहीं था। सिर्फ भारत जाने के लिए हवाई टिकट का दर 70 हजार रुपये कर दिया गया था। छात्र अली ने बताया कि भारत सरकार को इस पर नजर देना चाहिए था। लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। जिस कारण छात्र अब डर के साये के बीच रह रहे हैं।
इन छात्रों ने बताया कि उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही भारत सरकार व झारखंड सरकार उन सभी को वहां से वापस लाने की पहल करेगी। फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट में 50 प्रतिशत कम लगती है फीस विदेश में मेडिकल की डिग्री लेने वाले छात्रों को फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट (एफएमसी) कहते हैं। इसमें से अधिकतर ऐसे छात्र होते हैं जिन्हें कम अंक आने के बाद भी चीन, यूक्रेन, रूस जैसे अन्य देशों में आसानी से मेडिकल कॉलेज में नामांकन मिल जाता है। जिस वजह से सबसे अधिक मेडिकल के छात्र ही विदेश जाते हैं डिग्री लेने। विदेश में मेडिकल की पढ़ाई के लिए करीब 50 से 60 लाख रुपये लगता है। जबकि भारत के निजी मेडिकल कॉलेजों में 1.2 करोड़ तक लग जाता है।
झारखंड के मुख्यमंत्री ने जारी किया कंट्रोल रूम नंबर
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यूक्रेन में फंसे झारखंड के लोगों के लिए कंट्रोल रूम नंबर जारी किया है।
यूक्रेन में पढ़ने या रोजगार के लिए गए झारखण्डवासियों अथवा उनके परिवारजनों से अपील है कृपया झारखण्ड कंट्रोल रूम के निम्न फोन नंबरों पर संपर्क कर जानकारी देने की कृपा करें।
राज्य सरकार द्वारा भारत सरकार के साथ मिलकर सभी को हरसंभव मदद प्रदान की जाएगी। @IndiainUkraine @MEAIndia pic.twitter.com/RCwEfDqL9C— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) February 25, 2022

