रांची: तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ( KCR) शुक्रवार की दोपहर झारखंड पहुंचे। उन्होंने राजधानी रांची में झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन सहित कई और लोग मौजूद रहे। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रीय राजनीति पर चर्चा हुई।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी किसी फ्रंट का गठन नहीं हो रहा। देशभर के नेताओं और संगठनों से चर्चा कर रहे हैं। सब मिलकर भारत को सही दिशा में ले जाना चाहते हैं। इसका क्या माध्यम होगा। अभी यह तय नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की वर्तमान दशा ठीक नहीं है। केंद्र सरकार ठीक से काम नहीं कर रही है। सूत्र दावा कर रहे हैं कि दोनों नेताओं ने राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों का नया मोर्चा बनाने के मुद्दे पर विचार किया। अपने दौरे के दौरान KCR ने बिहार रेजिमेंट के शहीद जवान कुंदन ओझा की पत्नी नम्रता ओझा को दस लाख रुपये की सहयोग प्रदान की।
TRS प्रमुख के चंद्रशेखर राव ने तेलंगाना और झारखंड का कनेक्शन जोड़ने के लिए बिहार रेजिमेंट के शहीद जवान कुंदन ओझा का चयन किया है। गलवान घाटी में चीन के साथ झड़प में बिहार रेजिमेंट के शहीद कर्नल बी संतोष बाबू तेलंगाना के सूर्यापेट के रहनेवाले थे। संतोष बाबू के साथ झारखंड के रहने वाला बिहार रेजिमेंट के जवान कुंदन ओझा अंगरक्षक के तौर पर साथ थे। दोनों की एक साथ शहादत को दोनों राज्यों के बीच भावनात्मक रिश्ते में बदलने की कोशिश है। इस भावनात्मक रिश्ते को लेकर KCR खुद को झारखंड की राजनीति में चर्चा में लाना चाहते हैं।
गत 16 जून 2020 को लद्दाख के गलवन घाटी में चीनी सेना से मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त करनेवाले कुंदन ओझा झारखंड के साहिबगंज जिले के सदर प्रखंड के डिहारी गांव के रहने वाले हैं। मुख्यमंत्री तेलंगाना सरकार की तरफ से शहीद की पत्नी नम्रता ओझा को दस लाख रुपये की सहायता देगे। कुंदन ओझा को मरणोपरांत सेना मेडल मिल चुका है। 15 जनवरी 2022 को नई दिल्ली के करियप्पा परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में नम्रता ओझा को थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने यह मेडल सौंपा था। कुंदन ओझा का नाम वार मेमोरियल में भी अंकित किया गया था।
पल-पल बदल रही राजनीति
तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री KCR कुछ दिनों पहले तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशंसक रहे। राज्यसभा में जब भी विधेयकों को पास कराने की जरूरत पड़ती तो उनकी पार्टी ने अक्सर केंद्र सरकार का साथ दिया। बदलते राजनीतिक घटनाक्रम में KCR ने मोदी और भाजपा विरोध का झंडा उठा लिया है। इसका कारण यह है कि तेलंगाना में TRS को भाजपा से चुनौती मिल रही है। अब वहां TRS का मुकाबला कांग्रेस के बजाय भाजपा से है। ऐसे में वे मोदी विरोधियों में सबसे आगे दिखना चाहते हैं। वह कांग्रेस की बजाय दूसरे सभी विपक्षी दलों को राष्ट्रीय स्तर पर एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।

