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    Home»झारखण्ड»झारखंड विधानसभा का बजट सत्र:CM ने कहा; जल्द होंगे पंचायत चुनाव, सदन में उठा सुनील, शक्तिनाथ और निर्मल महतो की हत्या का मामला
    झारखण्ड

    झारखंड विधानसभा का बजट सत्र:CM ने कहा; जल्द होंगे पंचायत चुनाव, सदन में उठा सुनील, शक्तिनाथ और निर्मल महतो की हत्या का मामला

    Koylanchal SamvadBy Koylanchal SamvadMarch 14, 2022No Comments6 Mins Read
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    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि पंचायत चुनाव नहीं होने से राज्य सरकार को 700 से 800 करोड़ का नुकसान हो चुका है। जिस ट्रिपल टेस्ट के बारे में हमेशा सदन में बात आ रही है, उसमें सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में कहीं यह नहीं कहा गया है कि ट्रिपल टेस्ट कराए बगैर पंचायत चुनाव नहीं होंगे। यदि ऐसा रहता तो ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र में पंचायत चुनाव नहीं होते। झारखंड में 2021 से पंचायत चुनाव लंबित है। मुख्यमंत्री बजट सत्र के दौरान झारखंड विधानसभा में पंचायत चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।

    उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मामले में दोहरी नीति अपना रहा है। चुनाव भी करने के लिए दवाब बना रहा है और ट्रिपल टेस्ट भी कराने की बात करता है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मुझे तो यह जानकारी मिली है कि विपक्ष चुनाव के लिए मुखिया को सड़क पर उतारने का माहौल बना रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में भी पिछड़ी जाति के कई सदस्य है। यहां कहां आरक्षण है? ट्रिपल टेस्ट कराने में समय लगेगा और सरकार को धन की भी हानि होगी। ट्रिपल टेस्ट पर भविष्य में निर्णय लेंगे। जहां OBC बहुल क्षेत्र है] वहां तो OBC चुनकर आएंगे ही। इसलिए सरकार बिना ट्रिपल टेस्ट कराए पंचायत चुनाव कराएगी।

    इससे पहले सदन की कार्यवाही आरंभ होते ही आजसू विधायक सुदेश महतो ने सुनील महतो, शक्तिनाथ महतो और निर्मल महतो की हत्या का मामला उठाया। कहा कि इनकी हत्या के पीछे राजनीतिक साजिश बताया जाता है। झारखंड सरकार उपरोक्त मामलों में क्या NIA से जांच कराने की इच्छा रखती है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि निर्मल महतो हत्याकांड पर आरोप पत्र समर्पित किया जा चुका है। सुनील महतो हत्या की जांच CBI कर रही है। शक्तिनाथ महतो की हत्या 1977-78 में हुई थी। यह नीतिगत सवाल नहीं है।सुदेश महतो ने कहा कि तीनों ही झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता रहे हैं। पॉलिटिकल हत्या के मामले में केवल आरोपी को पकड़कर जेल भेजना ही काफी नहीं होता। इस मामले में साजिश का पर्दाफाश किया जाना चाहिए।

    झारखंड विधानसभा के जारी सत्र के दौरान सोमवार को सदन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि कोल कंपनियां रैयतों से कोल बेरिंग एक्ट के तहत जमीन लेती है। यह भारत सरकार का कानून है, राज्य सरकार का नहीं। पूर्व की सरकार ने रैयतों की जमीन वापसी का कानून नहीं बनाया था बल्कि लैंड बैंक में खाली पड़ी जमीन को रखने का निर्णय लिया था। कहा कि रैयतों की जमीन वापसी के मामले पर कोल बेरिंग एक्ट एवं भूमि अधिग्रहण कानून का विस्तृत अध्ययन कर वैधानिक राय लेने के बाद सरकार निर्णय लेगी।

    1932 का खतियान रहेगा ही,1964 और 1974 के सर्वे का अध्ययन करा रही सरकार
    सदन में विधायक सरयू राय ने सरकार से जानना चाहा कि क्या स्थानीयता नीति के लिए 1932 के खतियान के आधार बनाना चाहती है। उन्होनें यह भी जानना चाहा कि पूर्व की सरकार ने स्थानीय नीति 2016 में तय किया था। उसमें संसोधन भी किया है जो सरकार को स्वीकार नहीं है। संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि 1932 का खतियान तो रहेगा ही, सरकार 1964 और 1974 में सर्वे की भी समीक्षा कर रही है। अभी 2016 का स्थानीय नीति चल रहा है। सरकार बहुत जल्द नई स्थानीय नीति लाएगी, इसके लिए त्रि स्तरीय मंत्रिमंडलीय उप समिति के गठन का मामला सरकार के समक्ष विचाराधीन है।

    फर्जी डिग्री लेकर चपरासी से क्लास वन अफसर बन गए
    विधायक बंधु तिर्की ने सदन में सचिवालय सहित राज्य सरकार के अन्य कार्यालयों में फर्जी नियुक्ति का मामला उठाया। कहा – बहुत से कर्मी ऐसे आएं हैं जो काशी विद्यापीठ, देवघर विद्यापीठ से फर्जी डिग्री लेकर नौकरी कर रहे हैं। चार से पांच प्रोन्नति मिल गयी है। जो लोग चपरासी के पद पर नियुक्त हु थे वे अब क्लास वन अधिकारी बन गए हैं। सरकार को अधिक वेतन देने पड़ता है। राजस्व की हानि हो रही हैं। ऐसे कर्मियों की जांच हो, मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि लिपिक के 15 प्रतिशत पदों पर निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक अहर्ता रखने वाले समूह ‘घ’ के योग्य कर्मियों की सीमित प्रतियोगिता परीक्षा द्वारा प्रोन्नति के आधार पर नियुक्ति का प्रावधान है। प्रोन्नति के लिए नियम बना हुआ है। कहना मुश्किल है कि डिग्री फर्जी है या नहीं। किसी व्यक्ति का मामला है तो सदस्य बताएं, जांच कर कार्रवाई होगी।

    स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति तथा वन एवं पर्यावरण विभाग के लिए अनुदान की मांग
    विधानसभा बजट सत्र के दूसरी पाली में स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति तथा वन एवं पर्यावरण विभाग की अनुदान मांग पर विपक्ष के कटौती प्रस्ताव पर चर्चा हुई। भाजपा विधायक अनंत ओझा ने कटौती प्रस्ताव लाते हुए कहा कि भारी- भरकम बजट का कोई औचित्य नहीं है। जब इसकी राशि ही खर्च न हो। चालू वित्तीय वर्ष में ही अभी तक स्वास्थ्य के बजट में महज 36 प्रतिशत राशि ही सरकार खर्च कर पाई है। खाद्य आपूर्ति विभाग में भी अब तक 31.86 प्रतिशत राशि खर्च हो पाई है। उन्होंने डाक्टर और नर्स की भी भारी कमी होने का जिक्र करते हुए कहा कि मानव संसाधन के अभाव में मरीजों को सहज चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना संभव नहीं है।

    दोनों तरफ से हुआ आरोप-प्रत्यारोप
    विधानसभा में स्वास्थ्य की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विधायकों की एक दूसरे पर टीका-टिप्पणी। किसी को बिना पेंदी का लोटा बताया तो किसी को न घर के न घाट के। भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही ने कहा कि मथुरा महतो का दर्द समझा जा सकता है। सरकार ने मंत्री की एक सीट खाली रखी है और पार्टी में सबसे सीनियर होते हुए भी मथुरा जी मंत्री नहीं बन पाए हैं। इस पर मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने भानु के वक्तव्य पर कहा कि ये बिना पेंदी के लोटा हैं। कभी किसी दल में रहते हैं, कभी किसी दल में। ये सोच रहे होंगे कि हो सकता है एक सीट इनके लिए रखा गया हो। वहीं, प्रदीप यादव ने भी हस्तक्षेप करते हुए भानु स पूछा कि आडवाणी और जोशी जी के बारे में उनका क्या विचार है? इस पर भानु ने आसन से कहा कि प्रदीप यादव तो न घर के रह गए हैं न ही घाट के। ये न तो अभी कांग्रेस में हैं न ही झाविमो में। दर्द तो इन्हें भी है। अनुदान मांग पर चर्चा के बाद सरकार के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि कोरोना में केंद्र ने झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार किया। वहीं, राज्य में भाजपा की पिछली सरकार ने हमें जर्जर स्वास्थ्य विभाग सौंपा।

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