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    Home»Breaking News»शिक्षा और शांति का अद्भुत संगम : रामगढ़ का चेटर गांव बना आदर्श मॉडल
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    शिक्षा और शांति का अद्भुत संगम : रामगढ़ का चेटर गांव बना आदर्श मॉडल

    AdminBy AdminAugust 26, 2025No Comments2 Mins Read
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    रामगढ़। झारखंड का चेटर गांव शिक्षा, शांति और आपसी समझदारी के लिए देशभर में एक मिसाल बन गया है। रांची से लगभग 100 किमी दूर बसे इस गांव में हर घर से कोई न कोई शिक्षक, सरकारी कर्मचारी या फिर शोधार्थी (पीएचडी स्कॉलर) निकलता है। यही कारण है कि यहां शिक्षा का स्तर बेहद ऊँचा है और लोग मिलजुलकर बिना किसी विवाद के रहते हैं।

    हर घर में शिक्षक या सरकारी कर्मचारी

    गांव के हर तीसरे घर में कोई न कोई शिक्षक या सरकारी नौकरी में कार्यरत व्यक्ति है। यहां तक कि कई परिवारों से बच्चे सिविल सेवा और अन्य बड़ी परीक्षाओं में सफल होकर अधिकारी बन चुके हैं।

    ग्रामसभा में सुलझते हैं हर मसले

    गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कभी कोई विवाद थाना-पुलिस तक नहीं पहुंचा। सभी समस्याएं ग्रामसभा में बुजुर्गों और जिम्मेदार लोगों की मौजूदगी में सुलझा ली जाती हैं। यहां लिए गए फैसले को हर कोई सम्मानपूर्वक मानता है।

    शिक्षा और जागरूकता का परिणाम

    गांव में बच्चों को शिक्षा के प्रति खासा प्रेरित किया जाता है। यहां बाल मजदूरी शून्य है, सभी बच्चे स्कूल जाते हैं। उच्च विद्यालय में 12वीं तक की पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध है। यही कारण है कि गांव का हर बच्चा शिक्षा के प्रति जागरूक है।

    धार्मिक सौहार्द की मिसाल

    गांव में मंदिर, मस्जिद और गिरजाघर सभी हैं, लेकिन कभी भी धार्मिक विवाद की स्थिति नहीं बनी। यहां सभी लोग सौहार्द और भाईचारे के साथ रहते हैं।

    खेती और स्वच्छता में भी आगे

    चेटर गांव के लोग खेती को भी महत्व देते हैं। धान, गन्ना और सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। ग्रामसभा बच्चों और युवाओं को साफ-सफाई के प्रति भी लगातार जागरूक करती है। इसके साथ ही सरकार की योजनाओं को लागू करने में भी ग्रामसभा सक्रिय रहती है।

    विदेशी यूनिवर्सिटी भी कर चुकी है अध्ययन

    चेटर गांव का यह मॉडल इतना लोकप्रिय हो चुका है कि इसे समझने के लिए विदेशी यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि भी यहां आ चुके हैं। वे यह जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर यह गांव बिना किसी विवाद के, शिक्षा और समझदारी के बल पर इतनी शांति से कैसे रह रहा है।

    गांव के मुखिया की सोच

    गांव के मुखिया का कहना है –
    “शिक्षा ही शांति की असली कुंजी है। जब लोग पढ़े-लिखे होते हैं तो विवादों से दूरी रखते हैं और मिलजुलकर समाधान निकालते हैं।”

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