आज पूरा देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती मना रहा है, जिसे पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और अन्य प्रमुख नेताओं ने नेताजी के अदम्य साहस, बलिदान और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को याद किया। संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित मुख्य समारोह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के श्री विजय पुरम (पूर्व में पोर्ट ब्लेयर) में नेताजी स्टेडियम में आयोजित किया गया, जहां उपराज्यपाल एडमिरल डी.के. जोशी मुख्य अतिथि रहे। प्रधानमंत्री मोदी का संदेश कार्यक्रम में प्रसारित किया गया।

पराक्रम दिवस 2026 की मुख्य विशेषताएं
- मुख्य आयोजन: 23 से 25 जनवरी तक श्री विजय पुरम में तीन दिवसीय कार्यक्रम, जिसमें सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, प्रदर्शनियां और युवाओं के लिए प्रेरणादायक गतिविधियां शामिल हैं।
- अन्य स्थान: देशभर में 13 ऐतिहासिक स्थलों पर विशेष कार्यक्रम, जैसे कटक (उनका जन्मस्थान), कोलकाता, दिल्ली आदि।
- राष्ट्रीय स्कूल ऑफ ड्रामा द्वारा 24 जनवरी को “नेताजी” नाटक का मंचन।
- प्रधानमंत्री संग्रहालय में बच्चों और युवाओं के लिए शैक्षिक-मनोरंजक गतिविधियां, जैसे नेल एंड यार्न क्राफ्ट आदि।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जीवन और पराक्रम आज भी विकसित भारत के संकल्प को प्रेरित करता है। उन्होंने नेताजी की विरासत को संरक्षित करने के सरकारी प्रयासों का उल्लेख किया, जैसे इंडिया गेट पर उनकी भव्य प्रतिमा, अंडमान-निकोबार द्वीपों का नामकरण (रॉस द्वीप को नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप), INA से जुड़ी वस्तुओं का संरक्षण और फाइलों का डिक्लासिफिकेशन।
आजाद हिंद फौज और नेताजी के प्रमुख योगदान

नेताजी ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान आजाद हिंद फौज (INA) को पुनर्जीवित किया और इसे एक शक्तिशाली सशस्त्र बल बनाया:
- 1943 में सिंगापुर पहुंचकर INA का पुनर्गठन किया।
- आजाद हिंद सरकार की स्थापना (21 अक्टूबर 1943, सिंगापुर) – ब्रिटेन और अमेरिका पर युद्ध घोषित।
- रानी झांसी रेजिमेंट की स्थापना (महिला सैनिकों के लिए, कैप्टन लक्ष्मी सहगल के नेतृत्व में)।
- प्रसिद्ध नारे: “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा”, “दिल्ली चलो”, “जय हिंद”।
- इम्फाल-कोहिमा अभियान (1944) में ब्रिटिश सेना पर हमला, जिसने साम्राज्य की नींव हिलाई।
- INA ट्रायल (1945-46) ने देशव्यापी आंदोलन पैदा किया, जिसने ब्रिटिशों को भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया।
नेताजी ने कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए (1938-39) मतभेदों के कारण इस्तीफा दिया, फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की और विदेशों से सशस्त्र संघर्ष का रास्ता अपनाया।

मौत का रहस्य: आज भी अनसुलझा
नेताजी की मौत का रहस्य 80 वर्ष बाद भी सुलझा नहीं है। आधिकारिक रूप से 18 अगस्त 1945 को ताइवान (ताइहोकू) में प्लेन क्रैश में जलने से मौत बताई जाती है।
- जांच आयोग: शाह नवाज कमिटी (1956), खोसला कमीशन (1970) ने प्लेन क्रैश की पुष्टि की।
- मुखर्जी कमीशन (2005): मौत तो हुई, लेकिन प्लेन क्रैश में नहीं; रेनकोजी मंदिर की राख नेताजी की नहीं।
- गुमनामी बाबा थ्योरी: फैजाबाद में रहने वाले रहस्यमयी व्यक्ति को कई लोग नेताजी मानते थे।
- 2016 में जापानी दस्तावेजों से प्लेन क्रैश की पुष्टि, लेकिन कई सवाल बाकी।
- हाल के वर्षों में मिशन नेताजी जैसे संगठन नई जांच और विदेशी खुफिया फाइलों की मांग कर रहे हैं।
नेताजी का जीवन आज भी युवाओं को साहस, एकता और देशभक्ति की प्रेरणा देता है। जय हिंद! नेताजी अमर रहे!

