अलग झारखंड आंदोलन के महानायक, आदिवासी समाज की बुलंद आवाज और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत सरकार मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित करेगी। लोक कल्याण, सामाजिक न्याय और आदिवासी अधिकारों के लिए उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए केंद्र सरकार ने यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस घोषणा के बाद झारखंड समेत पूरे देश में उनके समर्थकों और राजनीतिक दलों में खुशी की लहर है।
🏹 आदिवासी अधिकारों के संघर्ष की पहचान थे शिबू सोरेन
शिबू सोरेन का नाम झारखंड आंदोलन की आत्मा माना जाता है। उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में जल-जंगल-जमीन, आदिवासी अस्मिता, सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
उनकी राजनीति केवल सत्ता तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह जनआंदोलन का रूप रही। अलग झारखंड राज्य के निर्माण में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही है।
🏛️ झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में योगदान
शिबू सोरेन ने झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में भी कई जनहितकारी फैसले लिए। आदिवासी समाज को राजनीतिक पहचान दिलाने, पंचायत व्यवस्था को मजबूत करने और सामाजिक समरसता बढ़ाने में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।
उन्हें ‘दिशोम गुरु’ की उपाधि आदिवासी समाज ने उनके संघर्ष और नेतृत्व के लिए दी थी।
🗣️ बसंत सोरेन ने जताया आभार, भारत रत्न की मांग
पद्म भूषण सम्मान की घोषणा पर उनके बेटे और झामुमो विधायक बसंत सोरेन ने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा—
“मैं भारत सरकार को धन्यवाद देता हूं। लेकिन सरकार को अब दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न से सम्मानित करने पर भी विचार करना चाहिए।”
🤝 अर्जुन मुंडा ने भी किया फैसले का स्वागत
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भी इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह सम्मान झारखंड के लिए गौरव की बात है और शिबू सोरेन के संघर्षों को सच्ची श्रद्धांजलि है।
🏛️ कांग्रेस और झामुमो नेताओं की प्रतिक्रिया
झारखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा—
“दिशोम गुरु शिबू सोरेन को पद्म भूषण से सम्मानित करना सराहनीय है, लेकिन देश और दुनिया उन्हें भारत रत्न के रूप में देखती है।”
वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव बिनोद पाण्डेय ने कहा कि शिबू सोरेन भारत रत्न के पूर्ण रूप से हकदार हैं और सरकार को इस दिशा में जल्द निर्णय लेना चाहिए।
🌿 स्थानीय जनप्रतिनिधियों का समर्थन
खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड उप प्रमुख अरुण साबू ने भी इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन केवल भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आदिवासी समाज के लोकप्रिय नेता रहे हैं। उन्हें भारत रत्न दिया जाना चाहिए।
📌 झारखंड के लिए गौरव का क्षण
शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण दिया जाना न सिर्फ उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे झारखंड के लिए सम्मान और गर्व का विषय है। यह सम्मान उनके संघर्ष, त्याग और आदिवासी समाज के लिए किए गए ऐतिहासिक योगदान को अमर करेगा।

