चुरचू प्रखंड में सात लोगों की दर्दनाक मौत के बाद दहशत का पर्याय बने पांच जंगली हाथियों के झुंड का आखिरकार मंगलवार को पता चल गया। लगातार तीन दिनों तक चले सघन सर्च अभियान के बाद वन विभाग की राज्य स्तरीय संयुक्त टीम ने चड़री पहाड़ी की तलहटी में हाथियों के झुंड को चिन्हित किया।
ड्रोन कैमरों की मदद से की गई निगरानी इस अभियान में निर्णायक साबित हुई। घटना के बाद हाथियों का झुंड लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ था।
कई इलाकों में दिखी थी गतिविधि
हाथियों की मौजूदगी की सूचना करगी, बोदरा, बाली, बागजोबरा, कीमो और मयूरनचवा के जंगलों से मिल रही थी। शाम ढलते ही कई गांवों में सन्नाटा पसर जाता था और लोग खेतों व जंगल की ओर जाने से बच रहे थे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए झारखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और ओडिशा के वन विभाग की टीमों को भी लगाया गया। रामगढ़, कोडरमा, गिरिडीह, चतरा और बोकारो जिलों से सात क्यूआरटी (त्वरित प्रतिक्रिया) टीमों का गठन कर व्यापक सर्च अभियान चलाया गया।
ड्रोन और ग्रामीणों की मदद से मिली सफलता
घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में ड्रोन से लगातार निगरानी की गई। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा बताए गए मार्ग, हाथियों के ताजा पैरों के निशान और गोबर के आधार पर टीम चड़री पहाड़ी की तलहटी तक पहुंची, जहां झुंड विश्राम करता पाया गया।
अभियान में हजारीबाग आरसीएफ आरएन मिश्रा, बोकारो आरसीएफ तांगा पांडयन, हजारीबाग डीएफओ विकास उज्जवल, रामगढ़ डीएफओ नीतीश कुमार, चतरा डीएफओ राहुल मीणा और कोडरमा डीएफओ सामित्व शुक्ला सहित कई वन अधिकारी सक्रिय रहे। ओडिशा की दस सदस्यीय विशेषज्ञ टीम भी मौके पर मौजूद रही।
लोगों को सतर्क रहने की अपील
वन विभाग ने आसपास के गांवों में माइकिंग कर लोगों को सतर्क रहने की अपील की है। हाथियों को सुरक्षित रूप से आबादी क्षेत्र से दूर जंगल के भीतर खदेड़ने की रणनीति पर काम जारी है।
अधिकारियों का कहना है कि जब तक झुंड पूरी तरह सुरक्षित क्षेत्र में नहीं पहुंच जाता, तब तक निगरानी और सर्च अभियान लगातार जारी रहेगा।

