बंगाल में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से पूरा कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट एक के बाद एक अभूतपूर्व आदेश दे रहा है। पहले तार्किक विसंगतियों की जांच और अनमैप नामों की जांच के लिए पश्चिम बंगाल के न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त करने के आदेश दिए थे।
लेकिन 500000 लोगों के नामों की जांच के लिए राज्य के न्यायिक अधिकारी पर्याप्त न होने पर शीर्ष अदालत ने पड़ोसी राज्य ओडिशा और झारखंड के न्यायिक अधिकारियों को भी तैनात करने की इजाजत दे दी है। इसके अलावा कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा है कि वह तीन वर्ष या उससे अधिक अनुभव रखने वाले सिविल जज सीनियर डिवीजन व सिविल जज जूनियर डिविजन की भी तैनाती कर सकते हैं ताकि जांच का काम जल्दी पूरा हो।
इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा है कि जांच के दौरान एसआईआर के लिए मान्य दस्तावेजों के अलावा माध्यमिक यानी कक्षा दस का एडमिट कार्ड और माध्यमिक प्रमाणपत्र व पहचान के लिए आधार मान्य होंगे। 14 फरवरी से पहले डिजिटली या फिजिकली जमा कराए गए दस्तावेज ही स्वीकार किये जाएंगे।
अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित होगी लेकिन तब तक जांच का काम पूरा न हो पाने के कारण चुनाव आयोग को उसके बाद भी पूरक मतदाता सूची प्रकाशित करने की इजाजत होगी जिसे अंतिम मतदाता सूची का हिस्सा माना जाएगा। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जोयमाल्या बाग्ची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह आदेश कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा 22 फरवरी को भेजे पत्र के आलोक में दिए।

