शहर में जारी एलपीजी गैस संकट का असर अब रेलवे की व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। भारतीय रेल के रनिंग रूम में ठहरने वाले लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर के भोजन में कटौती करनी पड़ी है। फिलहाल रनिंग रूम में केवल सीमित भोजन ही उपलब्ध कराया जा रहा है।
गैस सिलेंडर की कमी के कारण अब लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर को भोजन में केवल चावल या रोटी, दाल और भुजिया या चोखा दिया जा रहा है। पहले जहां उनके लिए अलग-अलग तरह के व्यंजन बनाए जाते थे, वहीं अब मेन्यू को सीमित कर दिया गया है।
मनपसंद भोजन बनवाने की सुविधा बंद
एलपीजी गैस की कमी के कारण रनिंग रूम में बाहर से राशन लाकर अपनी पसंद का भोजन बनवाने की सुविधा भी फिलहाल बंद कर दी गई है। पहले कई लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर अपनी जरूरत की राशन लाकर किचन में भोजन बनवा लेते थे, लेकिन एलपीजी गैस की सीमित उपलब्धता के कारण यह व्यवस्था रोक दी गई है।
रनिंग रूम में प्रतिदिन आते-जाते हैं चालक और ट्रेन मैनेजर
रेलवे के रनिंग रूम में प्रतिदिन कई ट्रेन चालक और ट्रेन मैनेजर ड्यूटी के दौरान विश्राम के लिए आते हैं। यहां उन्हें ठहरने के साथ भोजन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।
रांची रेल मंडल में ट्रेनों के संचालन के दौरान चालक और तीन प्रबंधक ट्रेन लेकर आते-जाते रहते हैं, इसलिए उनके लिए रनिंग रूम में भोजन और आराम की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है।
गैस संकट से से कई व्यवस्थाएं प्रभावित
शहर में जारी गैस संकट के कारण घरों के साथ-साथ होटल, ढाबा और अन्य संस्थानों की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। अब इसका असर रेलवे की रनिंग रूम व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। गैस आपूर्ति सामान्य होने के बाद भोजन की व्यवस्था भी पहले की तरह कर दी जाएगी, ताकि लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर को बेहतर सुविधा मिल सके।
इंडक्शन व लकड़ी के चूल्हे पर बनेगा खाना
शहर में जारी गैस संकट का असर अब रेलवे की व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। भारतीय रेल ने लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर के लिए बनाए गए रनिंग रूम में वैकल्पिक व्यवस्था लागू कर दी गई है।
एलपीजी गैस की कमी को देखते हुए अब रनिंग रूम में खाना इंडक्शन स्टोव और लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जाएगा, जबकि गैस सिलेंडर को केवल आपात स्थिति के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। रेलवे प्रशासन ने सभी रनिंग रूम प्रभारी को निर्देश दिया है कि छोटे रनिंग रूम में दो इंडक्शन स्टोव और बड़े रनिंग रूम में चार इंडक्शन स्टोव की व्यवस्था तत्काल की जाए।
इसके अलावा अतिरिक्त व्यवस्था के तौर पर लकड़ी का चूल्हा भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि भोजन की तैयारी बाधित न हो। साथ ही रनिग कर्मियों में इसे लेकर रोष है। उनका कहना है कि इतनी लंबी डयूटी करने के बाद उन्हें दाल -भात चोखा खाकर पूरी डयूटी करनी होगी।

