31 मार्च 2026, आज यह वह तारीख है जिस दिन भारत को नक्सलियों, माओवादियों से मुक्त कर देने का ऐलान किया जाना तय था। हालांकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार, 30 मार्च को ही यह ऐलान कर दिया कि अब देश नक्सलियों से मुक्त हो चुका है। हालांकि झारखंड अब तक नक्सलियों से पूरी तरह मुक्त नहीं हुआ है। एक खूंखार नक्सली कमांडर मिशिर बेसरा और उसके साथी राज्य के सारंडा के जंगल में मौजूद हैं। केंद्र सरकार का दावा है कि बेसरा तीन-चार दिन में सरेंडर कर सकता है। उस पर सुरक्षा बलों ने शिकंजा कस लिया है। जानते हैं कि यह अकेला दुर्दांत नक्सली कमांडर सुरक्षा बलों की पहुंच से क्यों बाहर बना रहा है?
बेसरा शिबू सोरेन को मानता था अपना आदर्श
मिशिर बेसरा गिरिडीह जिले के एक गांव का रहने वाला है। यह एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली कमांडर है। करीब 30 साल पहले बेसरा गरीबों के हकों के लिए लड़ता था। वह झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन को अपना आदर्श मानता था। बाद में वह हिंसा के रास्ते पर चल पड़ा। सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने मिसिर बेसरा की शुरुआत माओवादी कैडर के रूप में हुई थी। धीरे-धीरे उसने अपना नेटवर्क बढ़ाया और झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत बना ली।
मिशिर बेसरा के तीन मजबूत सुरक्षा घेरे
मिशिर बसेरा पर कई पुलिस कर्मियों की हत्या का आरोप है। यही कारण है कि सरकार ने उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। उसके खिलाफ कई अभियान चलाए गए, लेकिन वह हर बार बच निकलने में कामयाब होता रहा। वह कड़ी सुरक्षा में रहता है। उसकी सुरक्षा के तीन घेरे हैं। उसके माओवादी साथियों का एक दस्ता हमेशा उसके साथ रहता है। दूसरा दस्ता उससे एक किलोमीटर दूर के दायरे में पहरा देता है। तीसरा दस्ता आसपास के गांवों में फैला रहता है। यह तीसरा दस्ता हर समय किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखता है। इससे पुलिस का मिशिर बेसरा तक पहुंचना हमेशा मुश्किल होता रहा है।
सुरक्षा बलों के ऑपरेशन चले तो कोल्हान के जंगल को बनाया ठिकाना
जब झारखंड में सुरक्षा बलों ने माओवादियों के खिलाफ बड़े अभियान शुरू किए तो मिशिर बेसरा ने कोल्हान के घने जंगलों को अपना ठिकाना बना लिया। इन जंगलों में छुपकर वह अपनी गतिविधियां संचालित करता रहा है। सुरक्षा बल उसे लगातार घेरने की कोशिश करते रहे। पुलिस पिछले साल उसके कुछ साथियों को पकड़ने में कामयाब हो गई। जिससे उसके सारंडा के जंगलों में मौजूद होने की सूचना मिली। तब से सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस उसे घेरने के प्रयास करती रही हैं।
सारंडा के जंगल में घिरा, लेकिन भागने में हुआ सफल
इसी माह सांरडा के जंगल में मिशिर बेसरा को घेरने में कामयाब हो गया था। हालांकि वह मुठभेड़ के दौरान में बच निकलने में कामयाब हो गया था। झारखंड के सारंडा के जंगलों में 7 मार्च को सुरक्षा बलों के जवानों ने मिसिर बेसरा को घेर लिया था। इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों और मिसिर बेसरा के दस्ते के बीच जमकर गोलीबारी हुई थी। करीब एक घंटे तक दोनों ओर से गोलीबारी की गई थी। इस मुठभेड़ में कुछ नक्सली घायल हुए थे, लेकिन मिसिर बेसरा अपने कुछ साथियों के साथ भागने में सफल हो गया था।
जंगल में बिछाए आईईडी बम
मिशिर बेसरा के साथी नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के लिए सारंडा के जंगल में कई जगह आईईडी बम बिछा रखे हैं। इस कारण सर्च ऑपरेशन के दौरान आईईडी ब्लास्ट से जवान घायल हो जाते हैं।

