राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सूचना आयुक्तों की नियुक्ति पर स्वीकृति नहीं दी है। उन्होंने संबंधित फाइल राज्य सरकार को वापस लौटा दी है।
राज्यपाल ने कहा है कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय के चर्चित अंजलि भारद्वाज मामले में पारित आदेश तथा सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रविधानों को देखें कि क्या इनके अनुरूप ही सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की अनुशंसा की गई है?
राज्यपाल ने फाइल के साथ विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों द्वारा सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की अनुशंसा के विरोध में लेकर लोक भवन से की गई शिकायतों और पत्रों को भी संलग्न किया है।
राज्यपाल द्वारा फाइल लौटाने से सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में पेंच फंस गया है। बताया जाता है कि राज्यपाल ने इससे पहले राज्य सरकार द्वारा अनुशंसित नामों पर विधिक राय ली थी, जिसके बाद उन्होंने फाइल लौटाने का निर्णय लिया।
राज्य सरकार ने सूचना आयुक्तों के चार पदों के लिए नामाें की अनुशंसा राज्यपाल को भेजी थी, जिनमें तीन किसी न किसी पार्टी के थे।
राज्य सरकार ने कमेटी की अनुशंसा पर वरिष्ठ पत्रकार अनुज सिन्हा के अलावा झामुमो के आइटी सेल प्रभारी तनुज खत्री, प्रदेश कांग्रेस महासचिव अमूल्य नीरज खलखो तथा प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक के नाम स्वीकृति के लिए भेजे थे।
कई संगठनों ने राज्यपाल से नेताओं को सूचना आयुक्त पद के लिए योग्य नहीं बताते हुए नियुक्ति की स्वीकृति नहीं देने की मांग की थी।
इधर, सूचना आयुक्तों के मामले में झारखंड हाई कोर्ट में 13 अप्रैल को सुनवाई होनी है। राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त के अलावा सूचना आयुक्त के पद हैं, जो लंबे समय से रिक्त हैं।
झारखंड हाई कोर्ट ने इन पदों को शीघ्र भरने को कहा है। राज्य सरकार ने सात अप्रैल तक नियुक्ति करने की बात कोर्ट में कही थी।

