रांची: झारखंड के बोकारो और हजारीबाग जिले में ट्रेजरी से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, जिसमें एक उच्चस्तरीय आईएएस कमेटी और सीआईडी जांच की मांग की गई थी। इस घोटाले में पुलिस अधिकारियों के वेतन के नाम पर सरकारी खजाने में सेंध लगाई गई है। सोमवार को वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में वित्त विभाग की एक विशेष कमेटी का गठन होगा। वहीं, इस पूरे मामले में रची गई आपराधिक साजिश की परतें सीआईडी की तफ्तीश में खुलेंगी।
आईएएस कमेटी और सीआईडी की संयुक्त जांच
झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, अब तक दर्ज सभी प्राथमिकियों को सीआईडी को ट्रांसफर किया जाएगा। जहां आईएएस कमेटी वित्तीय अनियमितताओं और विभागीय खामियों की जांच करेगी। वहीं, सीआईडी ये पता लगाएगी कि इस सुनियोजित चोरी के पीछे कौन से माफिया या अपराधी सक्रिय थे। जांच का दायरा केवल दो जिलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अन्य जिलों में भी संभावित गड़बड़ियों की पड़ताल की जाएगी।
तकनीकी जांच के लिए एजी ऑफिस की मदद
झारखंड ट्रेजरी घोटाले की गहराई और तकनीकी बारीकियों को देखते हुए, वित्त विभाग ने प्रधान महालेखाकार (AG Office) से संपर्क किया है। सरकार चाहती है कि एजी ऑफिस के किसी अनुभवी अधिकारी को इस उच्चस्तरीय कमेटी का सदस्य बनाया जाए। इससे ट्रेजरी सॉफ्टवेयर और बिलिंग प्रक्रिया में हुई हेराफेरी को पकड़ने में आसानी होगी और दोषियों के खिलाफ ठोस सबूत जुटाए जा सकेंगे।
25 महीने में निकाली 63 बार सैलरी
- बोकारो ट्रेजरी से एक रिटायर पुलिसकर्मी के नाम पर 4 करोड़ 29 लाख रुपये से अधिक की अवैध निकासी हुई। आशंका है कि ये पूरा घोटाला 50 करोड़ रुपये या उससे भी अधिक का हो सकता है।
- जुलाई 2016 में रिटायर हो चुके उपेंद्र सिंह को कागजों पर दोबारा नौकरी में दिखाया गया। नवंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच पिछले 25 महीनों में कुल 63 बार फर्जी तरीके से वेतन निकाला गया।
- इस मामले में एसपी कार्यालय के अकाउंटेंट कौशल किशोर पांडेय को गिरफ्तार किया गया। उस पर बिल मैनेजमेंट सिस्टम (DDO Level) में छेड़छाड़ कर फर्जी वेतन बिल बनाने का गंभीर आरोप है।
- जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी अकाउंटेंट ने घोटाले की रकम पहले अपने बैंक खाते में और बाद में अपनी पत्नी (अनु पांडेय) के खाते में ट्रांसफर की।
- पुलिस ने दोनों के खातों में जमा भारी राशि को फ्रीज कर दिया है। झारखंड में इस बड़े वित्तीय घोटाले के सामने आने के बाद पूरे प्रशासनिक विभाग में हड़कंप मच गया है।
रडार पर सार्जेंट मेजर और डीएसपी स्तर के अधिकारी
सरकारी विभाग में वेतन निकासी की प्रक्रिया काफी जटिल होती है, जिसमें पुलिस लाइन से मास्टर रोल पर सार्जेंट मेजर के हस्ताक्षर होते हैं। इसके बाद लेखापाल, बड़ा बाबू और अंत में डीएसपी (निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी) के हस्ताक्षर से ट्रेजरी से भुगतान होता है। ऐसे में जांच की आंच डीएसपी, सार्जेंट मेजर और लेखा शाखा के क्लर्कों तक पहुंचना तय माना जा रहा है। इसी तर्ज पर कभी बिहार-झारखंड में चारा घोटाला हुआ था।

