रांची: रिम्स के जूनियर डॉक्टर की कोरोना से हुई मौत से सारे चिकित्सकों में आक्रोश है. उनका कहना है की सरकार से सांत्वना के अलावा कुछ सहायता नहीं मिली.
मदद के लिए बढ़े थे अनगिनत हाथ, खून से लेकर पैसे तक की मदद को आगे आये रिम्स के डॉक्टर
ECMO के लिए छह यूनिट ब्लड की जरूरत थी, रिम्स ब्लड बैंक की मदद से महज कुछ ही समय मे ब्लड की व्यवस्था कर दी गई थी.
वही दूसरी ओर टीम प्रन्यास के साथ डॉ स्मिता गुप्ता और उनके सहयोगी ने मिलकर दो लाख की आर्थिक मदद की
पैथोलॉजी विभाग की चिकित्सक डॉ स्मिता गुप्ता हमेशा से ही लोगों की मदद करते आयी हैं, नियमित रूप से रक्तदान करना एवं लोगों को प्रेरित करना आदत रही है इनकी.
पहले भी करते आये हैं ऐसी मदद
6 अप्रैल को भी डॉ संजय कुमार के द्वारा रिम्स टीचर एसोसिएशन ग्रुप में रिम्स के ही 98 बैच के चिकित्सक डॉ राजन के लिए मदद माँगी गयी थी उस समय भी डॉ स्मिता गुप्ता ने अपने दोस्तों के सहयोग से 22 हज़ार की अर्थिक मदद की थी.
पैथोलॉजी विभाग के जूनियर डॉक्टरों ने भी की थी अर्थिक मदद
डॉ सिराजुद्दीन की नाज़ुक स्थिति के मद्देनजर पैथोलॉजी पीजी के छात्रों ने काफ़ी तत्परता से 40 हजार रुपये की आर्थिक मदद की थी , साथ ही विभाग के सीनियर चिकित्सकों ने भी भरपूर मदद की सहमती जतायी थी !
सरकार की ओर से अबतक कोई पहल नहीं
डॉ सिराजुद्दीन की इलाज में लाखों रुपये खर्च हुए, लेकिन सरकार ने अब तक कोई पहल नहीं की है. रिम्स के जूनियर डॉक्टर जल्द से जल्द उनके परिवार को मदद करने की गुहार कर चुके हैं. टीम प्रन्यास के अध्यक्ष डॉ चंद्रभूषण ने बताया कि चिकित्सक अगर संक्रमित होते हैं तो इनके इलाज की पूरी व्यवस्था सरकार की ओर से सुनिश्चित किया जाना चाहिए.

