रांची : राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड के संभावित मामलों की पहचान के लिए डोर टू डोर अभियान की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य ने इस संबंध में सभी उपायुक्तों को घर-घर जाकर व अभियान की विस्तृत योजना के लिए पत्र जारी किया है.
एनआरएचएम झारखंड को रैपिड एंटीजेन टेस्ट और लक्षणों के आधार पर संभावित कोविड रोगियों की पहचान के लिए फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी दी गयी है. वहीं हर पंचायत में आइसोलेशन सेंटर बनाने को कहा गया है. जहां पर पॉजिटिव मरीजों को उनके परिवार वालों से अलग रखा जायेगा.
प्रशिक्षण से मरीज पहचानने में मदद
झारखंड के तीन करोड़ लोगों को कोरोना से बचाने के लिए सखी मंडल की दीदी सहित हजारों स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और अन्य को घर-घर जाकर सर्वेक्षण को सफल बनाने के लिए प्रशिक्षण देने की शुरुआत हुई. राज्य के हर ब्लॉक में दल द्वारा एएनएम, सीएचओ, एमपीडब्ल्यू और सहिया दीदी को प्रशिक्षित किया जा रहा है.
फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को ऑक्सीमीटर चलाने और संबंधित लक्षणों की जानकारी भी दी जा रही है. संभावित संक्रमित की पहचान कर कोविड-19 टेस्ट लिए लैब भेजा जा सकता है. सभी मेडिकल ऑफिसर और एएनएम वर्चुअली शामिल हुए.
डोर टू डोर के तहत हर घर का सर्वेक्षण
डोर टू डोर सर्वे के दौरान फ्रंटलाइन वर्कर की टीम संबंधित पंचायत के हर घर का दौरा करेगी. इस दौरान किसी घर में कोई भी पॉजिटिव केस, पिछले दो महीनों में किसी की मौत या कोविड लक्षणों वाले व्यक्ति की पहचान के लिए हर घर का सर्वेक्षण किया जायेगा. यदि परिवार का कोई सदस्य संक्रमित पाया जाता है, तो टीम यह सुनिश्चित करेगी कि परिवार के अन्य सदस्यों का भी टेस्ट हो.
इसके लिए एक टेस्ट सेंटर भी काम करेगा. अगर किसी में कोविड के लक्षण पाये जाते हैं, तो उन्हें जल्द से जल्द टेस्ट के लिए ले जाया जायेगा. प्रत्येक पंचायत में एक क्वारंटाइन सेंटर भी संचालित होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जो कोई भी पॉजिटिव पाया जाता है वह अपने परिवार के अन्य लोगों से दूर रहे. प्रत्येक मरीज के स्वास्थ्य की जांच के लिए प्रत्येक जांच केंद्र पर एक सहिया के साथ एक सीएचओ को नियुक्त किया जायेगा.

