बेरमो सीसीएल के ढोरी प्रक्षेत्र और बीएंडके प्रक्षेत्र के मध्य स्थित फुटबॉल ग्राउंड को सीआईएसएफ तथा सीसीएल सुरक्षा गार्ड की मौजूदगी में काटने तथा ग्राउंड के बगल से नाला बनाने का प्रयास किया गया। इसका स्थानीय विस्थापितों व ग्रामीणों ने विरोध कर दिया। इस पर पहले राउंड में सीआईएसएफ और सुरक्षा गार्ड ने विस्थापितों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। बाद में गांव के सारे महिला-पुरुष और सुभाषनगर के कुछ लोग पहुंचे। इसके बाद इस काम का विरोध करते हुए लोगों ने काम को रुकवा दिया। इसके बाद प्रबंधन ग्राउंड काटने के लिए लाए हुए मशीन को वापस ले गई।
रैयतों ने कहा कि हम अपनी जान दे देंगे। पर अपने पूर्वजों की जमीन को ऐसे नहीं लूटने देंगे। मौके पर विरोध जताते हुए रैयत बबीता देवी, सुनीता देवी, बंधनी देवी, सरस्वती देवी, सुनीता देवी, तुलसी देवी, पदमा देवी, सप्तमी देवी, उर्मिला देवी, रीता देवी, मुनकी देवी, राजेश गुप्ता, लालमोहन आदि ने बताया कि सीसीएल प्रबंधन विस्थापितों को हक दिए बगैर और बिना वार्ता किए जबरन उनकी जमीन हड़पने की कोशिश कर रही है। प्रबंधन द्वारा ना ही नौकरी, मुआवजा और पुनर्वास की बात कही गई और ना ही रैयतों को इस संबंध में कोई सूचना दी गई।
रैयत बबीता देवी ने कहा कि हम लोगों ने अपने कागजात सीसीएल बीएंडके प्रबंधन को 7 जनवरी 2021 को जमा करा दिया है। इसके बाद भी तीन बार स्थानीय तथा एरिया प्रबंधन को कागजात दिया है। हम अपनी रैयती जमीन पर अपने परिवार के साथ रहते और खेती कर गुजर बसर करते हैं। रैयतों ने बताया कि प्रबंधन की ओर से बार-बार सीआईएसएफ तथा सीसीएल के सुरक्षा गार्ड के बल पर जबरन जमीन पर कब्जा करने की नियत से कार्य करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार ने यह नियम नहीं बनाया है कि रैयतों को बल पूर्वक उनकी जमीन से बेदखल कर वहां खदान बना लें या फिर रैयतों के जमीन पर कब्जा कर लें।
क्या कहते हैं अधिकारी
उक्त जमीन सीसीएल द्वारा अधिग्रहित की गई है। विस्थापितोंं को नियमानुसार हक दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। नियम के अनुसार जिनकी 2 एकड़ जमीन गई है, उन्हें ही नौकरी मिल सकती है। लेकिन कुछ लोग छोटी-छोटी जमीन पर भी नौकरी मांगते हैं जो संभव नहींं है। लेकिन इतना तय है कि विस्थापितों का हक नहींं मारा जाएगा और जो भी नियमसंगत हक बनता है वह निश्चित रूप से दिया जाएगा। कारो खदान का विस्तार के लिए ग्राउंंड का काटा जाना आवश्यक हो गया है। – जीएन सिंह, मैनेजर, कारो परियोजना।

