झारखंड की राजधानी रांची में सामने आए रेमडेसिविर कालाबाजारी के मामले में गुरुवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एसआईटी की ओर से जांच रिपोर्ट अदालत में दाखिल की गई। जिसको देखने बाद चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने एसआईटी प्रमुख अनिल पालटा को ऑनलाइन जोड़ने का निर्देश दिया। कुछ देर बाद अनिल पलटा कोर्ट में पेश हुए। इस पर अदालत ने पूछा कि जब कालाबाजारी से संबंधित दवा के उत्पादन तिथि सहित अन्य दस्तावेज एजेंसी के पास मौजूद है तो फिर इसकी जांच रिम्स कैसे पहुंच गई।
इस पर अनिल पलटा ने बताया कि इस मामले में गिरफ्तार राजीव सिंह के मोबाइल के वॉइस रिकॉर्ड की जांच के दौरान पता चला कि रिम्स की एक संविदा कर्मी ने भी रेमडेसिविर की चोरी की है। इसके बाद संबंधित पक्षों का बयान लिया गया। जिसमें रिम्स कर्मी ने चोरी की बात स्वीकार की है। इसके बाद उनकी ओर से रिम्स से जांच कर पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी गई है। ताकि जांच को आगे बढ़ाया जा सके। इसके बाद अदालत ने रिम्स को कहा कि वे जल्द से जल्द जांच एजेंसी को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराएं। हालांकि इस मामले में अदालत ने कोई आदेश पारित नहीं किया है।
हाइकोर्ट की निगरानी में हो रही जांच
रांची पुलिस की ओर से कोरोना काल में शहर में चल रहे रेमडेसिविर की कालाबाजारी के मामले में छापेमारी की गई थी। बाद में यह जांच सीआइडी को सौंप दी गई। झारखंड हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए इसकी जांच अपनी निगरानी में कराने का निर्णय लिया। जांच के दौरान इस मामले में रांची के ग्रामीण एसपी नौशाद आलम का नाम सामने आया। पता चला कि उनके चालक की ओर से ब्लैक में रेमडेसिविर इंजेक्शन की खरीद की गई थी।कोर्ट ने इसे बेहद गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।

