रांची: भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को सुहागिनों के द्वारा हरितालिका तीज का सुख सौभाग्यदायिनी व्रत किया जाता है। इस व्रत को सुहागिन महिलाएं अपने सुख सौभाग्य की रक्षा के साथ मनोरथ सिद्घि हेतु करती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को सर्वप्रथम पर्वतराज हिमवान की पुत्री माता पार्वती ने भगवान भोले शंकर को पति रूप में प्राप्ति के लिए किया था जिससे उनका मनोरथ सिद्घ हुआ। उसके बाद से ही अखंड सौभाग्य एवं मनोरथ सिद्घि हेतु यह व्रत सुहागिन स्त्रियों के द्वारा किया जाने लगा। इसे लेकर धनबाद की महिलाओं में उत्साह है। महिलाएं तीज से पहले श्रृंगार और पूजन सामग्री की खरीदारी में जुटी हैं।
हरितालिका तीज में मुख्य रुप से भगवान शिव एवं माता पार्वती का पूजन विधि विधान के साथ कर हरितालिका तीज की पुण्य प्रदायिनी कथा का श्रवण किया जाता है। हस्तयुक्त तृतीया उत्तम फलदायिनी मानी गयी है। इस बार 8 सितंबर बुधवार को रात्रि शेष 3:58 बजे के उपरांत तृतीया तिथि प्रारंभ होगी जो गुरुवार 9 सितंबर को रात्रि 2:12 बजे तक रहेगी। हस्त नक्षत्र बुधवार को संध्या 6:04 बजे से गुरुवार 9 सितंबर को शाम 5:13 बजे तक ही रहेगी। इस प्रकार इस बार हस्त युक्त तृतीया तिथि का उत्तम संयोग बन रहा है।
इस बार उत्तम संयोग में तीज
इस बार तीज में गुरुवार शुक्ल योग का उत्तम संयोग मिल रहा है। उपरोक्त योग संयोग के कारण हरितालिका तीज विशेष पुण्य प्रदायक एवं मनोरथ सिद्घिप्रद है। अत: गुरुवार 9 सितंबर को हरितालिका तीज का व्रत व पूजन करना उत्तम फलप्रद रहेगा। तीज व्रत हेतु नहाय खाय बुधवार 8 सितंबर को किया जाएगा। व्रत का पारण शुक्रवार 10 सितंबर को सूर्योदय के उपरांत करना श्रेयस्कर रहेगा।
निर्जला रखा जाता तीज व्रत
तीज व्रत निराहार और निर्जला किया जाता है। अगले दिन सुबह पूजा के बाद जल पीकर पारण का विधान है। इस दिन व्रत रखकर रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन और भगवान का ध्यान किया जाता है। अगले दिन सुबह पूजा के बाद किसी सुहागिन स्त्री को श्रृंगार का सामान, वस्त्र, खाने की चीजें, फल, मिठाई आदि दान करना शुभदायी होता है।

