रांची में बुधवार की रात खुले नाले में 55 साल के एक बुजर्ग बह गए। 16 घंटे बाद भी उनका शव नहीं ढूंढा जा सका है। NDRF और निगम की टीम की टीम की तलाश लगातार जारी है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि उनका शव बह कर 5 किलोमीटर दूर कांके डैम पहुंच गया है।
पंडरा थाना प्रभारी ने बताया कि पंडरा से कांके डैम जहां नाली समाप्त होती है वहां तक पूरी नाली को देख लिया गया है, लेकिन कहीं भी शव नहीं मिल पाया है। घटना के 15 घंटे बाद NDRF की टीम पहुंची है। लेकिन अभी तक शव को नहीं ढूंढा जा सका है। अब कई जगह पर नाले को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
राजधानी को स्मार्ट सिटी बनाने का सपना दिखाने वाले शहर के 53 वार्डों में स्थित नालियों की सफाई पर निगम माह करीब 1.50 करोड़ रुपए खर्च करता है। नगर निगम प्रत्येक माह रोस्टर के अनुसार नालियों की सफाई कराने का दावा करता है। इतना ही नहीं राजधानी में होनेवाले जल जमाव को रोकने के लिए रांची नगर निगम और पथ निर्माण विभाग की ओर से हर वर्ष करीब 140 करोड़ से अधिक रुपये खर्च किये जाते हैं। इसके बाद भी हर साल इसमें बह कर लोगों की मौत हो रही है।
दो साल के भीतर बहने की तीसरी घटना
रांची में नाले में बहने की दो साल में यह तीसरी घटना है। पिछले वर्ष सितंबर में कोकर के खोरहाटोली में एक युवक की बहने से मौत हो गई थी। उसका भी शव नहीं मिल पाया था। दो साल पहले हिंदपीढ़ी के नाले में भी एक बच्ची बह गई थी।
सासंद ने कहा-नगर आयुक्त और मेयर की लड़ाई में पिस रहे लोग
वहीं घटना की सूचना मिलने के 15 घंटे बाद रांची के सांसद संजय सेठ और विधायक सीपी सिंह घटनास्थल पर पहुंचे। संजय सेठ ने कहा कि इस दुर्घटना के लिए पूरी तरह नगर निगम और सरकार दोषी है। मेयर और नगर आयुक्त की लड़ाई में रांची की जनता पिस रही है। इससे दुर्भाग्य क्या हो सकता है कि स्मार्ट सिटी रांची में आदमी नाले में बह जा रहा हैं।
सब्जी विक्रेता अपने घर लौट रहे थे
घटना रात के 8.30 बजे की है। 55 वर्षीय सब्जी विक्रेता अजय अग्रवाल अपनी साइकिल से घर लौट रहे थे। इसी क्रम में वे पंडरा के पंचशील नगर के पास उफनते नाले में समा गए। उनकी साइकिल और चप्पल वहीं नाले के पास से बरामद की गई है। वे मूल रूप से रामगढ़ के रहने वाले थे यहां पंडरा के सहदेव नगर में किराए का कमरा लेकर सब्जी का व्यापार करते थे।

