रांची: नगर निगम में नेता वर्सेज अधिकारी की जारी है। सोमवार को जनता के मुद्दे पर प्रस्तावित बोर्ड की बैठक इसी लड़ाई के भेट चढ़ गया। बैठक शुरू होने से पहले अधिकारियों ने हंगामा शुरू कर दिया। वे मेयर के खिलाफ नारेबाजी करने लगे और बैठक में शामिल होने से इंकार कर दिए।
उनकी मांग थी कि मेयर ने जिस तरह से अधिकारियों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है उससे वो आहत हैं। इसलिए जब तक मेयर अपनी बातों को वापस नहीं ले लेती हैं तब तक बैठक की कार्यवाही नहीं होने दी जाएगी। अधिकारियों के पक्ष में कुछ पार्षद भी उतर आए और हंगामा शुरू कर दिया।
इसके बाद अधिकारियों की मनमानी को लेकर मेयर के साथ अधिकतर पार्षद गेट पर ही धरने पर बैठ गए। मेयर ने कहा कि इस तरह से अधिकारियों को मनमानी करने नहीं दी जाएगी।
मेयर ने कहा- बातचीत के दौरान जुबान फिसल गई होगी
इधर मेयर का कहना था कि हो सकता है कि बातचीत के दौरान जुबान फिसल गई होगी। इसलिए मैं अपनी बातों को वापस लेती हूं। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों से बैठक शरू करने की अपील की, लेकिन अधिकारी नहीं माने।
क्यों हो रहा है विवाद
दरअसल 4 सितंबर को रांची नगर निगम की मेयर आशा लकड़ा ने नगर निगम के कर्मचारियों व पदाधिकारियों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि निगम के कर्मचारी -पदाधिकारी मोटी चमड़ी वाले हो गए हैं। ये लोग औरंगजेब का शासन चलाते हैं। मेयर के इसी बयान से अधिकारियों नाराजगी है। इससे पहले मेयर की बैठक और मीटिंग से अधिकारी गायब रह रहे हैं।
बोर्ड की बैठक नहीं होने से नहीं पास हो सकीं ये योजनाएं
बोर्ड की बैठक में सरकार की जल नीति पर चर्चा होनी थी। इसके अलावा स्ट्रीट लाइट में लगे टाइमर लगाने के लिए एजेंसी के चयन पर चर्चा होनी थी। पिछली बैठक में इन्हीं बिंदुओं को लेकर हंगामा हो गया था। मेयर ने इन प्रस्ताव पर रोक लगा दी थी। इसके बाद बोर्ड की बैठक स्थगित कर दी गई थी। तब से बोर्ड की बैठक नहीं हो पाई है।

