रांची: झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए IAS अधिकारी विनय चौबे के खिलाफ एक और प्राथमिकी दर्ज की है। इस बार FIR में उनके रिश्तेदारों और करीबी दोस्त विनय सिंह सहित कुल सात लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है। आरोप है कि विनय चौबे ने अपने परिजनों और सहयोगियों की मदद से अवैध कमाई का जाल बिछाया और करोड़ों की संपत्ति अर्जित की।
कौन-कौन नामजद? ACB की FIR में बड़े नाम शामिल
ACB ने FIR में इन लोगों को आरोपी बनाया है:
IAS विनय चौबे
उनकी पत्नी स्वप्ना संचिता
उनके करीबी मित्र विनय सिंह
विनय सिंह की पत्नी संचिता सिंह
विनय चौबे के साले शिपिज त्रिवेदी
शिपिज की पत्नी प्रियांका त्रिवेदी
विनय चौबे के ससुर एस.एन. त्रिवेदी
FIR में आरोप है कि सभी ने एक सिस्टमैटिक नेटवर्क के रूप में विनय चौबे की अवैध संपत्ति को छिपाने और निवेश करने में भूमिका निभाई।
करोड़ों की हेराफेरी और फर्जी लेन-देन का आरोप
ACB की जांच में सामने आया:
विनय चौबे की नौकरी से ज्ञात आय सिर्फ 2.20 करोड़ रुपये है
लेकिन उनके और उनके परिजनों के नियंत्रण वाले खातों में 3.47 करोड़ रुपये मिले
इस तरह 1.27 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति की पुष्टि हुई
यह उनकी ज्ञात आय से 53% अधिक है
जांच अधिकारियों के मुताबिक, भारी-भरकम राशि नकद, RTGS, लोन पेमेंट, जमीन रजिस्ट्री, कंपनियों को पेमेंट जैसे तरीकों से घुमाई गई।
पत्नी, साले, ससुर, दोस्त—सबके खातों का इस्तेमाल
ACB सूत्रों के अनुसार, विनय चौबे ने अवैध कमाई को छिपाने के लिए परिवार और दोस्तों के खातों का सुनियोजित उपयोग किया—
पत्नी, साले और ससुर के खाते
मित्र विनय सिंह और उनकी पत्नी के खाते
इन खातों में आने वाला पैसा आगे विभिन्न चैनलों से खर्च किया गया ताकि उसके मूल स्रोत का पता न चले। ACB को कई संदिग्ध और बड़े लेन-देन मिले हैं।
आदतन भ्रष्टाचार: जहां पोस्टिंग—वहीं घोटाला
ACB की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि:
हजारीबाग में उपायुक्त रहते हुए भूमि घोटाला
रांची में आबकारी विभाग में रहते हुए शराब घोटाला
अन्य पदों पर भी कई गड़बड़ी की शिकायतें दर्ज
शराब और जमीन घोटाले से जुड़े मामलों में विनय चौबे और विनय सिंह पहले से जेल में बंद हैं।
ACB अब क्या करेगी?
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद ACB की टीम अब—
सभी नामजदों के बैंक खातों की ट्रेसिंग
डिजिटल डेटा और मोबाइल लोकेशन
संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच
फर्जी लेन-देन की डीप ट्रैकिंग
जैसी प्रक्रियाएँ तेज कर चुकी है।

