झारखंड की राजधानी के रातू थाना क्षेत्र के झखराटांड़ से एक बहुत दर्दनाक मामला सामने आया है. यहां पर एक मुंहबोले भाई ने एक 13 साल की बच्ची की हत्या कर दी. बच्ची 13 मार्च की रात से ही लापता थी. पुलिस ने इस मामले में खुलासा कर दिया है. पुलिस की ओर से जानकारी दी गई है कि लापता बच्ची राजनंदिनी की 13 मार्च की रात में ही उसके मुंहबोले भाई राहुल उर्फ अक्षय ने हत्या कर दी थी. फिर शव को एंबुलेंस से गयाजी ले जाकर गुप्त तरीके से अंतिम संस्कार कर दिया. बाद में जब ग्रामीणों और पड़ोसियों को शक हुआ, तो मामले का खुलासा हुआ. हालांकि पुलिस की ओर से फिलहाल मामले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
पूजा-पाठ का काम करता है आरोपी
आरोपी सुबोध पाठक पूजा-पाठ कराने का काम करता है और उसका इलाके में दोतल्ला मकान भी है. हत्या के बाद आरोपी परिवार तीन दिनों तक घर से गायब रहा. 16 मार्च को लौटने के बाद भी बच्ची के गायब होने की कहानी गढ़ी गई. परिवार द्वारा बच्ची की आत्मा की शांति के लिए बंद कमरे में गरुड़ पुराण का पाठ कराया गया, ताकि किसी को कोई शक नहीं हो.
खुलासे के बाद आरोपी पिता-पुत्र गिरफ्तार
ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर के नेतृत्व में हुई जांच में घटना की परत-दर-परत खुलती चली गई. इसके बाद पुलिस ने आरोपी सुबोध पाठक और उसके पुत्र अक्षय पाठक को गिरफ्तार कर लिया है. एंबुलेंस चालक पिंटू कुमार को भी पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया है. इस मामले में एक और आरोपी कमलेश मेमोरियल अस्पताल का संचालक अमरेश पाठक फरार है. उसने मृत बच्ची का गयाजी में अंतिम संस्कार कराने में मदद की थी. उसकी तलाश जारी है. पुलिस ने घटना में इस्तेमाल एंबुलेंस (जेएच 01 एए 1245) जब्त कर ली है.
आरोपियों ने चार दिनों तक पुलिस को किया गुमराह
आरोपियों ने चार दिनों तक पुलिस और ग्रामीणों को गुमराह किया. लेकिन लगातार पूछताछ के बाद पांचवें दिन राहुल उर्फ अक्षय ने सच्चाई स्वीकार कर ली. इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ. पुलिस की जांच में पारिवारिक विवाद और प्रेम-प्रसंग की बात सामने आई है. जानकारी के अनुसार, सुबोध पाठक और उसके बेटे अक्षय के बीच अक्सर विवाद होता था. घटना की रात में भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ, जिसमें राजनंदिनी ने अपने फूफा सुबोध का पक्ष लिया. इससे नाराज होकर राजनंदिनी के मुंहबोले भाई राहुल ने उसका गला घोंट दिया, जिससे उसकी मौत हो गई. बताया जाता है कि बच्ची का राहुल के साले के साथ प्रेम-प्रसंग भी परिवार को नागवार गुजर रहा था, जिसे लेकर भी तनाव था.
अस्पताल संचालक की भूमिका है संदिग्ध
घटना के बाद कमलेश मेमोरियल अस्पताल के संचालक अमरेश पाठक मौके पर सुबोध पाठक के घर पहुंचा और बच्ची को मृत घोषित किया. इसके बाद उसकी मदद से एंबुलेंस के जरिए शव को गयाजी ले जाकर श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया.
पड़ोसियों का शक बना सुराग
घटना की रात बच्ची के चीखने की आवाज सुनकर पड़ोसियों को शक हुआ. दो अप्रैल को ग्रामीणों ने जब सख्ती से पूछताछ की, तो मामला संदिग्ध लगने लगा. इसके बाद पुलिस ने जांच तेज की और सच्चाई सामने आ गई. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और फरार आरोपी की तलाश में छापेमारी कर रही है. पूरे क्षेत्र में घटना को लेकर सनसनी और आक्रोश का माहौल है.
आठ साल से परिवार को अपना घर मानती थी बच्ची
रातू थाना क्षेत्र में सामने आए मामले में मृत बच्ची राजनंदिनी की पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी सामने आई है. बताया गया कि राजनंदिनी मूल रूप से औरंगाबाद जिले के अंबा गांव निवासी दिनेश मइवार की दूसरी पत्नी की बेटी थी. दिनेश मइवार शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं और उनकी आर्थिक स्थिति भी कमजोर है. इसी परिस्थिति को देखते हुए परिवार के परिचित रातू निवासी सुबोध पाठक राजनंदिनी को अपने साथ ले आए थे, ताकि उसका बेहतर पालन-पोषण हो सके. पिछले करीब आठ साल से राजनंदिनी सुबोध पाठक के घर में रह रही थी और उन्हें फूफा कहा करती थी. बताया जाता है कि सुबोध पाठक ने राजनंदिनी के आधार कार्ड में भी पिता के स्थान पर अपना नाम दर्ज करा रखा था. धीरे-धीरे राजनंदिनी ने पाठक परिवार को ही अपना असली परिवार मान लिया था और वह अपने पैतृक घर वापस जाना भी नहीं चाहती थी.

