राज्य में कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर अब सख्ती से रोक लगेगी। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मंगलवार को ‘झारखंड कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक, 2025’ को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। विधि विभाग द्वारा गजट में अधिसूचना जारी होते ही यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा और इसके सभी प्रविधान राज्यभर में लागू हो जाएंगे।
इस कानून के तहत बिना पंजीकरण कोई भी कोचिंग सेंटर संचालित नहीं किया जा सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर पहली बार 5 लाख रुपये और दूसरी बार 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
नियम नहीं मानने वाले सेंटर होंगे ब्लैकलिस्टेड
विधेयक का मुख्य उद्देश्य राज्य में कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण, नियंत्रण और विनियमन के साथ-साथ फीस, आधारभूत संरचना और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना है।
जो कोचिंग सेंटर बार-बार निर्देशों के बावजूद नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जा सकेगा और उनका पंजीकरण भी रद्द किया जाएगा।
यह कानून 50 से अधिक छात्र-छात्राओं वाले सभी कोचिंग संस्थानों पर लागू होगा, जिनमें ऑनलाइन और हाइब्रिड मोड में संचालित कोचिंग सेंटर भी शामिल हैं।
पंजीकरण के लिए बैंक गारंटी अनिवार्य
कानून के अनुसार, कोचिंग संस्थानों को पंजीकरण के लिए 5 लाख रुपये की बैंक गारंटी देनी होगी।
इसके अलावा, एक हजार से अधिक छात्रों वाले कोचिंग सेंटरों में मनोचिकित्सक की नियुक्ति अनिवार्य होगी, ताकि विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा सके।
पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा वेब पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिसके माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा।
लागू होंगे ये अहम प्रावधान
नए कानून के तहत कोचिंग सेंटरों को कई जरूरी नियमों का पालन करना होगा—
- 16 वर्ष से कम आयु के विद्यार्थियों के नामांकन से पहले अभिभावक की अनुमति अनिवार्य
- निर्धारित फीस, कोर्स, ट्यूटर, आधारभूत संरचना की जानकारी रेगुलेटरी कमेटी और वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होगी
- छात्रों की शिकायतों के लिए शिकायत निवारण सेल का गठन
- प्रत्येक विद्यार्थी के लिए कम से कम एक वर्ग मीटर बैठने की जगह
- कोचिंग सेंटरों का संचालन सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक ही किया जा सकेगा
राज्य स्तरीय कोचिंग सेंटर नियामक प्राधिकरण का गठन
कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए झारखंड राज्य कोचिंग सेंटर नियामक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा।
इस प्राधिकरण की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश (कम से कम प्रधान जिला न्यायाधीश) करेंगे।
प्राधिकरण में—
- सेवानिवृत्त संयुक्त सचिव स्तर के प्रशासनिक अधिकारी
- उपभोक्ता मामलों और शिकायत निपटारे के जानकार अधिकारी
- अवर सचिव या उससे वरीय अधिकारी सचिव के रूप में नियुक्त होंगे
प्राधिकरण की बैठक हर माह कम से कम एक बार होगी और यह जिला स्तरीय समिति के आदेशों के विरुद्ध अपील की सुनवाई करेगा।
शिक्षकों के लिए सख्त योग्यता मानक
कोचिंग सेंटरों में पढ़ाने वाले सभी ट्यूटरों का स्नातकोत्तर होना अनिवार्य होगा।
संस्थानों को ट्यूटरों की योग्यता सार्वजनिक करनी होगी और उनका पंजीकरण भी जरूरी होगा।
प्रत्येक ट्यूटर को—
- CTR-ID
- विशिष्ट पंजीकरण संख्या
प्रदान की जाएगी, जिसे आधार से लिंक किया जाएगा।
पुराने कोचिंग सेंटरों को 6 माह की मोहलत
कानून लागू होने से पहले से संचालित सभी कोचिंग सेंटरों को 6 महीने के भीतर पंजीकरण कराना होगा, या सरकार द्वारा बढ़ाई गई अवधि के अंदर।
यदि पंजीकरण आवेदन अस्वीकार होता है और अपील भी खारिज हो जाती है, तो ऐसा संस्थान अधिकतम 6 महीने तक ही संचालित हो सकेगा और नया नामांकन नहीं ले पाएगा।
जिला स्तर पर होगी निगरानी
कोचिंग संस्थानों की निगरानी जिला कोचिंग सेंटर नियामक समिति करेगी, जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त करेंगे।
समिति में शामिल होंगे—
- पुलिस अधीक्षक
- कुलपति द्वारा नामित अंगीभूत कॉलेज के प्राचार्य
- जिला नियोजन पदाधिकारी
- जिला शिक्षा अधीक्षक

