झारखंड हाइकोर्ट ने पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में नाबालिग थैलेसीमिया मरीजों को कथित रूप से HIV संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के मामले में FIR दर्ज करने का निर्देश दिया।
जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की एकल पीठ इस मामले में दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि अक्टूबर, 2025 में चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में नाबालिग याचिकाकर्ताओं को संक्रमित रक्त चढ़ाया गया, जिसके बाद वे एचआईवी से संक्रमित हो गए।
याचिकाकर्ताओं ने हाइकोर्ट से आग्रह किया कि इस गंभीर मामले में FIR दर्ज करने का निर्देश दिया जाए।
इसके साथ ही यह भी मांग की गई थी कि मामले की गहन और समयबद्ध जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया जाए, जिसकी निगरानी हाइकोर्ट स्वयं करे, ताकि दोषियों की आपराधिक जिम्मेदारी तय की जा सके।
याचिका में कहा गया कि ब्लड बैंक के प्रभारी अधिकारियों की लापरवाही और चूक के कारण पांच नाबालिग बच्चों की जान खतरे में पड़ गई।
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ताओं या उनके अभिभावकों द्वारा संबंधित थाना प्रभारी को कोई औपचारिक शिकायत नहीं दी गई, इसलिए अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया।
हाइकोर्ट ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि याचिकाकर्ता हाशिए पर रहने वाले वर्ग से आते हैं और उनकी शिकायत पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। अदालत ने कहा कि यदि शिकायत में संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है तो पुलिस का वैधानिक दायित्व है कि वह FIR दर्ज करे।
हाइकोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं में से कोई भी अपने अभिभावक के माध्यम से संबंधित पुलिस थाने में लिखित रिपोर्ट दर्ज कराए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी रिपोर्ट प्राप्त होते ही बिना किसी देरी के FIR दर्ज की जाए और उसकी एक प्रति सूचना देने वाले को उपलब्ध कराई जाए।
इसके अलावा हाइकोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि FIR दर्ज होने के बाद संबंधित थाना प्रभारी लिखित रिपोर्ट की एक प्रति प्रति-शपथपत्र के माध्यम से हाइकोर्ट में दाखिल करेगा।
मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी, 2026 को निर्धारित की गई है।

