रांची: हर वर्ष 24 मार्च को विश्व स्तर पर विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है. यह दिन जर्मन वैज्ञानिक रॉबर्ट कोच द्वारा टीबी के जीवाणु की खोज की याद में मनाया जाता है. इस वर्ष विश्व तपेदिक दिवस का थीम ‘Yes! We Can End TB–Led by Bharat, Powered by Janbhagidari’ रखा गया है.
इसका उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से टीबी उन्मूलन को तेज करना है. टीबी उन्मूलन कार्यक्रम झारखंड के स्टेट नोडल अधिकारी डॉ कमलेश कुमार ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि देशभर के साथ-साथ झारखंड सरकार द्वारा राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम (National Tuberculosis Elimination Programme) चलाया जा रहा है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश से टीबी का उन्मूलन करना है. कार्यक्रम के तहत टीबी के मरीजों को समय पर जांच, मुफ्त इलाज और पोषण सहायता उपलब्ध कराई जा रही है.
2025 में 9.49 लाख संदिग्ध मरीजों की हुई जांच
डॉ कमलेश कुमार ने बताया कि वर्ष 2025 में झारखंड में बड़ी संख्या में मरीजों की जांच हुई. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2025 में राज्य में 9,49,254 संदिग्ध मरीजों की जांच की गई, जिसमें 67,049 टीबी मरीजों की पहचान कर उनका उपचार शुरू किया गया. राज्य में टीबी उपचार की सफलता दर लगभग 90 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय लक्ष्य 85 प्रतिशत से अधिक है.
राज्य में मुफ्त जांच और इलाज की सुविधा
राज्य के सभी जिलों और प्रखंडों में टीबी की जांच और उपचार की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध है. टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के स्टेट नोडल अधिकारी के अनुसार राज्य में 389 बलगम जांच केंद्र, 41 CB-NAAT जांच केंद्र, दो अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं (रांची और धनबाद) और 177 True-nat मशीनों के माध्यम से प्रखंड स्तर पर टीबी जांच की सुविधा लोगों को पहुंचाई जा रही है. इन सुविधाओं के जरिए ड्रग सेंसिटिव और ड्रग रेजिस्टेंट टीबी की पहचान और इलाज किया जा रहा है.

