रांची। झारखंड की राजधानी रांची के लिए गुरुवार का दिन बेहद दुखद खबर लेकर आया। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान रांची के धुर्वा स्थित लाबेद गांव के रहने वाले जवान अजय लकड़ा शहीद हो गए। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान वह खाई में गिर पड़े, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
शहीद जवान की खबर मिलते ही पूरे गांव और इलाके में मातम पसर गया है। परिवार के लिए यह सदमा असहनीय है।
संघर्षों में पला-बढ़ा देश का वीर सपूत
शहीद अजय लकड़ा के पिता स्वर्गीय लोहरा उरांव का निधन कई साल पहले हो गया था, उस वक्त अजय बेहद छोटे थे। पिता की मौत के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां पोकलो देवी ने अपने कंधों पर उठाई। कठिन हालातों में उन्होंने हड़िया बेचकर और मजदूरी करके अपने बच्चों का पालन-पोषण किया।
अजय के एक छोटे भाई अरूण लकड़ा और चार बहनें हैं। मां की मेहनत और संघर्ष की बदौलत आज परिवार के कई सदस्य सरकारी सेवा में हैं।
बचपन से था सेना में जाने का सपना
अजय लकड़ा का सपना बचपन से ही देश की सेवा करना था। वह हमेशा खुद को शारीरिक रूप से फिट रखते थे और दौड़-भाग जैसी गतिविधियों में सक्रिय रहते थे। कड़ी मेहनत और लगन के दम पर वह करीब सात साल पहले भारतीय सेना में भर्ती हुए।
उनका छोटा भाई CISF में तैनात है, जबकि सबसे छोटी बहन अंजू लकड़ा झारखंड पुलिस में पदस्थापित हैं। तीन बहनों की शादी हो चुकी है।
सेना ने फोन पर दी शहादत की सूचना
सेना के अधिकारियों ने फोन के जरिए मां पोकलो देवी को बेटे की शहादत की सूचना दी। खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। गांव के लोग शहीद के घर पहुंचकर परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि शहीद अजय लकड़ा का पार्थिव शरीर शनिवार को रांची लाया जाएगा, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
दिसंबर में आए थे छुट्टी पर
शहीद अजय लकड़ा दिसंबर महीने में 15 दिन की छुट्टी पर रांची आए थे। छुट्टी पूरी होने के बाद वह ड्यूटी पर लौट गए थे। अजय अविवाहित थे। उन्होंने अपनी मां से कहा था कि परिवार की पूरी जिम्मेदारी निभाने के बाद ही विवाह करेंगे।
गांव और राज्य को गर्व
अजय लकड़ा की शहादत पर पूरे गांव के साथ-साथ झारखंड को भी गर्व है। लोग उन्हें एक साहसी, जिम्मेदार और कर्तव्यनिष्ठ सैनिक के रूप में याद कर रहे हैं।
देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले रांची के वीर सपूत अजय लकड़ा को पूरा झारखंड नमन करता है।

