Jharkhand के नक्सल प्रभावित जिलों में अब युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नई रणनीति पर काम शुरू हो गया है। छत्तीसगढ़ के सफल ‘बस्तर ओलंपिक’ मॉडल को अपनाते हुए झारखंड में भी खेल के जरिए नक्सलवाद के प्रभाव को कम करने की कवायद तेज कर दी गई है।
इस पहल के तहत Indrajeet Mahtha (डीआईजी, झारखंड जगुआर) को नोडल अफसर बनाया गया है, जो पूरे कार्यक्रम की निगरानी करेंगे।
क्या है योजना का उद्देश्य?
इस पहल का मुख्य लक्ष्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को—
खेल गतिविधियों से जोड़ना
रोजगार और शिक्षा की ओर प्रेरित करना
नक्सलवाद से दूर रखना
सरकार का मानना है कि खेल और सकारात्मक गतिविधियों से युवाओं की ऊर्जा सही दिशा में लगेगी।
‘बस्तर ओलंपिक’ क्यों बना मॉडल?
Bastar में आयोजित ‘बस्तर ओलंपिक’ नक्सल प्रभावित इलाकों में काफी सफल रहा था।
2025 में आयोजित इस प्रतियोगिता में सैकड़ों युवाओं ने हिस्सा लिया
कई युवाओं ने नक्सलवाद छोड़कर इसमें भागीदारी की
इससे सामाजिक जागरूकता और मुख्यधारा से जुड़ाव बढ़ा
इसी सफलता को देखते हुए इसे अन्य राज्यों में लागू करने का फैसला लिया गया।
झारखंड में कहां होगा फोकस?
केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार—
Chaibasa अभी भी नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शामिल
Latehar, Chatra और Bokaro को ‘थ्रेट’ और ‘लिगेसी’ श्रेणी में रखा गया है
इन जिलों में खेल प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की तैयारी शुरू हो गई है।

