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    Home»Featured»झारखंड की शांभवी ने रचा इतिहास, ICSE दसवीं में 100% अंक लाकर बनीं नेशनल टॉपर
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    झारखंड की शांभवी ने रचा इतिहास, ICSE दसवीं में 100% अंक लाकर बनीं नेशनल टॉपर

    AdminBy AdminApril 30, 2025No Comments4 Mins Read
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    शहर की होनहार बेटी शांभवी जायसवाल ने आईसीएसई की 10वीं बोर्ड परीक्षा में 100 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। लोयोला स्कूल की इस मेधावी छात्रा ने सेल्फ स्टडी के दम पर न केवल झारखंड, बल्कि पूरे भारत को गर्व का पल दिया।शांभवी के पिता अभिषेक जायसवाल, मेहर बाई टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल में रेडियोलॉजिस्ट हैं, और मां ओजस्वी शंकर, मणिपाल हॉस्पिटल कॉलेज में वरिष्ठ गायनोकोलॉजिस्ट हैं।

    शांभवी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने साबित कर दिया कि सच्ची लगन और मेहनत के आगे कोई मंजिल असंभव नहीं। वह भविष्य में कंप्यूटर साइंस इंजीनियर बनना चाहती हैं और पेंटिंग में भी उनकी गहरी रुचि है।

    मेहनत और अनुशासन की मिसाल

    शांभवी की सफलता का राज उनकी कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और समय का सही उपयोग है। उन्होंने हर विषय को गहराई से पढ़ा, नियमित अभ्यास किया और अपनी कमियों को सुधारा। बिना किसी कोचिंग या अतिरिक्त क्लास के, शांभवी ने घर पर ही सेल्फ स्टडी के बल पर यह मुकाम हासिल किया।

    उनकी मां ओजस्वी शंकर ने पढ़ाई के दौरान उनके हर सवाल का जवाब दिया और उनका हौसला बढ़ाया। शांभवी कहती हैं, मम्मी ने मेरे हर डाउट को आसान बनाया। उनकी वजह से मैं बिना रुके आगे बढ़ी।

    घर से मिली प्रेरणा, माता-पिता बने सहारा

    शांभवी के माता-पिता दोनों ही डॉक्टर हैं और शिक्षा के क्षेत्र में उनकी अपनी मिसाल है। पिता अभिषेक जायसवाल, मेहर बाई टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के रेडियोलॉजी विभाग में प्रमुख हैं, जबकि मां ओजस्वी शंकर, मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।

    पिता अभिषेक ने बताया, जब हमें पता चला कि शांभवी ने पूरे देश में टॉप किया है, तो पहले यकीन नहीं हुआ। वह स्कूल में हमेशा अव्वल रही, लेकिन देश में पहला स्थान हासिल करना सपने जैसा है। हम भगवान से उसकी तरक्की की प्रार्थना करते हैं। घर का शैक्षणिक माहौल और माता-पिता का मार्गदर्शन शांभवी के लिए सबसे बड़ा सहारा रहा।

    लोयोला स्कूल में उत्सव का माहौल

    जब आईसीएसई के परिणाम घोषित हुए और शांभवी का नाम नेशनल टॉपर के रूप में गूंजा, तो लोयोला स्कूल में खुशी की लहर दौड़ गई। शिक्षकों, सहपाठियों और स्कूल प्रशासन ने तालियों के साथ शांभवी का स्वागत किया।

    स्कूल के प्रिंसिपल ने इसे लोयोला के इतिहास का सबसे गौरवशाली क्षण बताया। स्कूल के शिक्षकों ने कहा, शांभवी की मेहनत और लगन हर छात्र के लिए प्रेरणा है। उसने हमें गर्व से सिर ऊंचा करने का मौका दिया।

     

    पेंटिंग में रुचि, इंजीनियर बनने का सपना

    शांभवी पढ़ाई के साथ-साथ पेंटिंग में भी माहिर हैं। कैनवास पर रंगों के साथ समय बिताना उन्हें सुकून देता है। भविष्य में वह कंप्यूटर साइंस में इंजीनियर बनकर देश का नाम रोशन करना चाहती हैं। अपनी इस सफलता का श्रेय वह अपनी मां, शिक्षकों और अपने आत्मविश्वास को देती हैं।

    शांभवी कहती हैं, मैंने हर दिन छोटे-छोटे लक्ष्य बनाए और उन्हें पूरा किया। मेरी मम्मी और मेरे स्कूल ने मुझमें यह विश्वास जगाया कि मैं कुछ भी कर सकती हूं।

    हर छात्र के लिए प्रेरणा की मिसाल

    शांभवी की यह उपलब्धि उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने दिखा दिया कि कोचिंग या महंगे संसाधनों के बिना भी मेहनत और लगन से शिखर तक पहुंचा जा सकता है। उनकी कहानी सिखाती है कि अगर मन में ठान लिया जाए, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।

    उनकी इस उपलब्धि ने साबित किया कि छोटे शहरों से भी ऐसी प्रतिभाएं निकल सकती हैं, जो विश्व स्तर पर अपनी छाप छोड़ें। सही मार्गदर्शन, परिवार का साथ और मेहनत के दम पर शांभवी ने नया इतिहास रच दिया। जमशेदपुर और झारखंड के लिए यह गर्व का पल है, और शांभवी जैसी बेटियां देश का भविष्य हैं।

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