झारखंड के सिमडेगा जिले के टिनगीना गांव के किसान राजेंद्र काशी ने जैविक खेती के क्षेत्र में ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने पूरे राज्य को गौरवान्वित कर दिया है। राजेंद्र काशी ने एक ही हल्दी के पौधे से करीब 15 किलोग्राम हल्दी का उत्पादन कर एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है।
उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से न सिर्फ जिले के किसान उत्साहित हैं, बल्कि यह सफलता पूरे झारखंड के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।
कृषि मेले में मचाई धूम, मिला प्रथम पुरस्कार
करीब एक वर्ष तक निरंतर मेहनत, धैर्य और वैज्ञानिक प्रयोगों के बाद तैयार की गई यह विशेष हल्दी हाल ही में आयोजित कृषि विकास मेला सह उद्यान प्रदर्शनी, सिमडेगा में आकर्षण का केंद्र रही। प्रदर्शनी में इस हल्दी को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
‘राजेंद्र’ नाम से जानी जाएगी हल्दी की नई किस्म
राजेंद्र काशी को उनकी इस उपलब्धि के लिए कुल 11 अलग-अलग पुरस्कार प्रदान किए गए। इतना ही नहीं, उनके द्वारा विकसित की गई हल्दी की नई किस्म का नाम भी उनके नाम पर ‘राजेंद्र’ रखा गया है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस किस्म की उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता बेहद उत्कृष्ट है और यह भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
युवा किसान सोनू सिंह का अहम योगदान
इस वर्ल्ड रिकॉर्ड को स्थापित करने में जलडेगा के युवा किसान सोनू सिंह का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने पूरे एक वर्ष तक इस प्रयोग में सक्रिय सहयोग किया और खेती की हर प्रक्रिया पर बारीकी से काम किया।
प्राकृतिक खेती से संभव हुआ असाधारण उत्पादन
सोनू सिंह के अनुसार, यह अभूतपूर्व उत्पादन पूरी तरह प्राकृतिक खेती पद्धति से संभव हुआ है। इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरक या कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं किया गया।
जीवामृत, कंपोस्ट खाद और लाभकारी सूक्ष्मजीवों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई गई, जिससे पौधे का विकास बेहतर हुआ और रिकॉर्डतोड़ उत्पादन संभव हो सका।
किसानों के लिए प्रेरणा बनी सफलता
राजेंद्र काशी की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। यह साबित करता है कि आधुनिक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग से खेती को लाभकारी, टिकाऊ और सम्मानजनक व्यवसाय बनाया जा सकता है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि आने वाले समय में जिले में जैविक और प्राकृतिक खेती को नई दिशा देगी और अधिक किसान इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

