राज्यसभा चुनाव में विपक्ष को बड़ा झटका लगा है. 11 राज्यसभा सीटों के लिए हुए सोमवार (16 मार्च 2026) को वोटिंग हुई थी. इस दौरान बिहार में 5, ओडिशा में 4 और हरियाणा में दो सीटों पर मतदान हुआ. बिहार और ओडिशा में विपक्षी दल अपने विधायकों को एकजुट रखने में सफल नहीं रहे, जिसका फायदा NDA को मिला. बिहार में 5 सीटों के लिए 6 उम्मीदवार मैदान में थे. इनमें 5 उम्मीदवार NDA से और एक उम्मीदवार विपक्षी गठबंधन महागठबंधन से था.
NDA ने सभी 5 सीटों पर जीत दर्ज की. जीतने वाले उम्मीदवारों में नीतीश कुमार, नितिन नबीन, रामनाथ ठाकुर, उपेन्द्र कुशवाहा और शिवेश राम शामिल हैं. राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 41 वोट जरूरी थे. 243 सदस्यीय विधानसभा में NDA के पास 202 विधायक हैं, जिससे उसे 5 वीं सीट के लिए 3 वोट कम पड़ रहे थे. महागठबंधन के पास 35 विधायक थे और उन्हें जीत के लिए 6 अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी.
AIMIM के 5 और बहुजन समाज पार्टी के एक विधायक के समर्थन के बाद विपक्षी उम्मीदवार A. D. सिंह की जीत की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन आखिरी समय में विपक्ष के 4 विधायक, जिनमें 3 कांग्रेस और 1 राजद विधायक शामिल थे वोट डालने नहीं पहुंचे. पहली वरीयता के वोटों में फैसला नहीं होने के बाद दूसरी वरीयता की गिनती हुई, जिसमें भाजपा के शिवेश राम ने जीत हासिल कर ली. इसके बाद महागठबंधन ने भाजपा पर विधायकों को डराने-धमकाने और खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया.
ओडिशा में क्रॉस वोटिंग से बदला चुनाव
ओडिशा में 4 सीटों के लिए 5 उम्मीदवार मैदान में थे और जीत के लिए 30 वोट जरूरी थे. यहां भाजपा के मनमोहन सामल और सुजीत कुमार ने जीत दर्ज की. बीजू जनता दल के संतरूप मिश्रा भी जीतने में सफल रहे. सबसे बड़ा उलटफेर तब हुआ जब भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे ने भी जीत दर्ज कर ली.

