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    Home»राष्ट्रीय»ASIAN GAMES में भारत के 100 से अधिक पदक जितने के अवसर पर खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने मिडिया के कुछ सवालों का दिया जवाब
    राष्ट्रीय

    ASIAN GAMES में भारत के 100 से अधिक पदक जितने के अवसर पर खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने मिडिया के कुछ सवालों का दिया जवाब

    AdminBy AdminOctober 9, 2023No Comments9 Mins Read
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    दिल्ली: ASIAN GAMES में भारत के 100 से अधिक पदक जितने के अवसर पर खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने मिडिया के द्वारा पूछे गए कुछ सवालों का जवाब दिया है. पढ़िए क्या है सवाल और उसके जवाब.

    • इस बार के एशियाई गेम्स भारत के लिए ऐतिहासिक रहे। क्या आप ऐसे परिणाम की अपेक्षा कर रहे थे?
    हमने कहा और हमने कर दिखाया! यह ऐतिहासिक परिणाम आने के पीछे कई कारक हैं : हमारे एथलीट्स की मेहनत और पदक लाने का जज़्बा, हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की समग्र स्पोर्ट्स इकोसिस्टम बनाने की दृष्टि, टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना की सहायता और सरकारी फंड्स ने ये ऐतिहासिक परिणाम मुमकिन किए हैं। हमने आपके कार्यकाल में ओलिंपिक में सबसे ज्यादा पदक जीते और अब एशियाई खेलों में 100 का आंकड़ा पार किया। भारत का प्रदर्शन एशियन गेम्स में आज तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन रहा। 107 मेडल जीत कर जो हमने कहा था, अबकी बार 100 बार तो भारत के खिलाड़ी ने 100 पार भी किया। पहले सुनते थे क्रिकेट में सेंचुरी लगती है। अब तो एशियन गेम्स में भी सेंचुरी लगाने का काम हुआ। इससे खिलाड़ियों का मनोबल भी बढ़ा तो देश भर के लोगों में एक नई ऊर्जा और देश के जो युवा और उभरते खिलाड़ी हैं उनको एक नई प्रेरणा मिली है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदर्शिता, उनके द्वारा प्रदान की गई सुविधाएं और हमारे खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत एवं दृढ़ संकल्प से भारत ने 100 पदक का आंकड़ा पार किया ।आने वाले समय में हम देखेंगे कि खेलों में और निवेश होगा। अभी तक माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जो सोच देश को दी है और जो सुविधाएं खिलाड़ियों को दी है ये उसी का परिणाम है। आप देखिए इस बार ओलंपिक में हमने आज तक के सबसे ज़्यादा सात मेडल जीते थे। फिर 19 मेडल पैरालंपिक गेन्स में , 20 मेडल डेफ ओलंपिक में, 21 मेडल कॉमनवेल्थ गेम में जीते। आज तक थॉमस कप नहीं जीते थे उसमें भी गोल्ड मेडल जीते. यूनिवर्सिटी गेम्स में 60 साल में 18 मेडल जीते थे, इस बार हमने 26 मेडल जीते जिसमें से 10 गोल्ड मेडल है और अब एशियन गेम्स में 107 मेडल, 100 का आंकड़ा पार किया और इससे पहले हमारी महिला खिलाड़ी 4 बार वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियन बनी। एक के बाद दूसरी खेलों में आप देखोगे तो लगातार भारत ने शानदार प्रदर्शन किया है। एशियन गेम्स के 72 साल के इतिहास में इस बार हमारे एथलीट्स ने कई विश्व रिकॉर्ड तोड़े और कई एशियन रिकॉर्ड्स भी बनाए हैं। एथलेटिक्स में 29 मेडल, शूटिंग में 22 मेडल, आर्चरी में 9 मेडल्स आए हैं”
    • 2018 के सापेक्ष, 2022 में ऐसा क्या हुआ जिसने ऐसे परिणाम सुनिश्चित किए?
    2018 में हमारे पास 70 पदक थे, 2022 में 107 हासिल हुए। यह 52 प्रतिषत की वृद्धि है और 75 पर्सेंट स्वर्ण पदक में वृद्धि है। 2020 में भी हमने अबतक का सबसे ऐतिहासिक ओलंपिक्स, पैरालिंपिक्स और डेफलिंपिक्स का प्रदर्शन किया है। यह हमारे एथलीट्स की मेहनत और स्पोर्ट्स इकोसिस्टम के कोच और सपोर्ट स्टाफ की वजह से मुमकिन हुआ है। यह बात भी सत्य है की एथलीट्स ने तो हमेशा ही मेहनत करी है, तो इस बार ऐसा क्या बदला? माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी की दृष्टि और भारतीय खेल पर विशेष ज़ोर ने हमारे लिए नए कीर्तिमान के द्वार खोल दिए हैं। आज हमारे देश के स्पोर्ट्स इकोसिस्टम में एक पिरामिड संरचना है जो साधारण से एलीट वर्ग तक पूरे देश में प्रतिभा खोज और पोषण करता है। माननीय मोदी जी के विज़न से 2014 में टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना की शुरुआत हुई। वह चाहते थे की प्रतिभाशाली एथलीट्स को हर वो सुविधा मिले जिससे वह विश्वस्तरीय परिणाम ला सके। आज इस योजना ने अभूतपूर्व परिणाम दिए। टॉप्स योजना के तहत हमारे खिलाड़ियों के 2 वर्ग हैं: विकासशील और एलीट । इन दोनो वर्गों के लिए सरकार ट्रेनिंग, आहार, विदेशी अनुभव, और उपकरण प्रदान करती है। इसके साथ इन दोनो वर्गों को मासिक खर्च मिलता है : एलीट वर्ग को 50000 प्रतिमाह और विकासशील को 25000 प्रतिमाह, और इससे वे अपने परिवार की देखभाल भी कर पाते हैं। 2018 में खेलो इंडिया योजना शुरू की गई जिससे देश के हर कोने से प्रतिभा की खोज और उनकी ट्रेनिंग का जिम्मा लिया गया। बहुत से खेलो इंडिया योजना के एथलीट्स आज हमारे एलीट वर्ग के खिलाड़ी हैं टॉप्स योजना के तहत। इस बार 124 खेलो इंडिया के एथलीट्स ने भारत का प्रतिनिधित्व किया जिसमे से ज्यादातर टॉप्स योजना से थे। हमारे एथलीट्स के खेल में और निखार आया है और हर स्तर से सबको सहायता भी है। खेलो इंडिया एथलीट्स न सिर्फ़ इस. ए. आई. ट्रेनिंग और खेलो इंडिया के पार्ट हैं पर उनको फ्री कोचिंग, रूम, आहार और 10000 का मासिक खर्च भी प्राप्त होता है। हमने देश के विभिन्न हिस्सों में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर भी बनाया है जिससे की हर खिलाड़ी को एक शुरुआती निरीक्षण मिल सके। 750 खेलो इंडिया सेंटर आज पूरे देश में स्थापित हैं और यह संख्या को हमे अगले साल तक 1000 तक पहुंचाना है। हमारे खेल बजट को तीन गुना बढ़ोतरी मिली है 2022-23 में 2013-14 के सापेक्ष। हमारी इन पहलों की वजह से हर खिलाड़ी को 360 डिग्री सपोर्ट मिला और यही मेहनत ने हमे यह फल ला के दिया।
    • एशियन गेम्स के लिए एथलीट्स को किस तरह का सपोर्ट दिया गया? 
    कॉमनवेल्थ खेलों के बाद एशियन गेम्स के लिए ट्रेनिंग कैंपों का आयोजन किया गया। हमने 275 विदेशी एक्सपर्ट, जैसे कोच, निर्देशक, मैनेजर्स, फिजियो स्टाफ, मनोवैज्ञानिक की भी नियुक्ति की। इसके अलावा 75 बार विदेशी अनुभव भी प्रदान कराया गया। TOP योजना के तहत हर खिलाड़ी को विशेष सहायता भी प्रदान की जाती है। नीरज चोपड़ा, सात्विक, चिराग शेट्टी, शरथ कमल, विष्णु सरवणन जैसे खिलाड़ियों को इसका भरपूर फ़ायदा मिला है जिसकी वजह से उन्हें विदेशी अनुभव, स्पोर्ट्स यंत्र, ट्रेनिंग, कोच की नियुक्ति और सहायक स्टाफ भी मिले।
    एथलीट्स की जरूरत के हिसाब से उन्हें विदेश में ट्रेनिंग भी मिली अंतरराष्ट्रीय सुविधाओं के साथ। नीरज चोपड़ा को 586 दिन की ट्रेनिंग मिली यूरोप, दक्षिण अफ्रीका और यूएसए में। विदेशी कोच और फिजियो ने यह सुनिश्चित किया कि साल भर एथलीट उत्तम स्तर पर खेलता रहे। हमने नौकायन में भी अच्छा किया है और टॉप्स योजना के तहत 2.88 करोड़ रुपए तक की विदेशी ट्रेनिंग और प्रतियोगिताएं कराई गई हैं। अविनाश साबले को विदेशी ट्रेनिंग और यूएसए, स्विट्जरलैंड, हंगरी और मोरोक्को में प्रतियोगिताओं में भाग दिलाया गया और एक निजी कोच भी प्रदान किया गया । शूटिंग में हमने 4 करोड़ तक के उपकरण और विदेशी ट्रेनिंग कैंप प्रदान कराई हैं । ट्रेनिंग कैंप जर्मनी, इटली, फ्रांस और चेक रिपब्लिक जैसी जगहों पे कराया गया और 185 दिन के कोचिंग कैंप में उपकरण और बैरल टेस्टिंग भी कराई गई। बैडमिंटन में एच एस प्रनॉय को खास उपकरण उपलब्ध कराए गए जिससे वो जल्द से जल्द रिकवरी करें ट्रेनिंग के बाद और एक अच्छे स्तर पर खेलते रहें। निजी सहायता स्टाफ जैसे एसएंडसी ट्रेनर, आहार विशेषज्ञ, और मनोवैज्ञानिक भी उपलब्ध कराए गए।
    • लगभग 30 प्रतिषत पदक एथलेटिक्स से आए हैं। क्या हम कह सकते हैं कि हमने एथलेटिक्स में अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है?
    पहले एथलेटिक्स को एक ऐसे खेल की तरह देखा जाता था जो सिर्फ पश्चिमी देश और अफ्रीकन देश जीत सकते हैं। हम कई बार चौथे पायदान पर आके आगे नहीं बढ़ पाए। पर अब सब कुछ बदल चुका है । नीरज चोपड़ा के ओलंपिक स्वर्ण पदक ने हर खिलाड़ी को एक नई ऊर्जा और उम्मीद प्रदान करी है। अविनाश सबले ने कॉमनवेल्थ खेलों में 3000 मीटर स्टीपलचेज में पदक पाया, जिसमे उन्होंने केन्या के खिलाड़ियों को हराकर साबित कर दिया कि हम किसी से कम नहीं। इस बार के एशियाई खेल में पारुल चौधरी का गोल्ड 5000 मीटर में, एक विशेष उपलब्धि थी। ये इस लिए भी ऐतिहासिक था क्योंकि उनका आखरी 10 सेकंड में जापानी एथलीट को हराने का जज्बा सराहनीय है। अब हमारे खिलाड़ी खेलने नही, जीतने जा रहे हैं।
    आज कई खिलाड़ी मुझे बताते हैं की उनको अपनी ट्रेनिंग सुविधाएं किसी देश से कम नहीं लगती और उनको देश के हर एक नागरिक का सपोर्ट महसूस होता है। माननीय प्रधानमंत्री की खिलाड़ियों से प्रतियोगिता के लिए निकलने से पहले और आने के बाद के बधाई और शुभकामना संदेश हर खिलाड़ी में नई ऊर्जा भरते हैं। ये है नई सोच! नया भारत!
    सपोर्ट की दृष्टि से, हर एथलीट को विदेशी अनुभव मिला। जंप, स्प्रिंट, रेसवॉक, मिडिल एवं लॉन्ग डिस्टेंस थ्रो जैसे खेलो में सबसे बेहतरीन विदेशी जानकार, यंत्र और इंजरी मैनेजमेंट प्रदान कराए गए।
    • महिला एथलीटों ने एक खास योगदान दिया है पदकों में। क्या आपको लगता है कि ये भारत के खेल दृष्टिकोण में एक बड़ा बदलाव लाया है?
    आज महिलाओं को हर क्षेत्र में उत्तम अवसर मिल रहे हैं चाहे वह संसद हो चाहे पोडियम। महिला खिलाडियों ने हमे 50.2 प्रतिषत पदक दिलाकर बेहद प्रफुल्लित किया है। कांस पदक महिलाओं ने पुरुषो से ज्यादा पाए हैं। यह दिखाता है कि आज उनका प्रदर्शन किसी से कम नहीं है। इस बार महिलाओं ने पहली बार क्रिकेट, टेबल टेनिस, गोल्फ, इक्वेस्ट्रियन जैसे खेलो में भी पदक लाया है। 3000 मीटर स्टीपलचेज और 50 मीटर राइफल में, महिला खिलाड़ियों ने स्वर्ण और कांस पदक दोनो पाए हैं और 10 मीटर पिस्टल में उन्होंने स्वर्ण और चांदी पदक दोनो पाए हैं। इससे एक बहुत बड़ा कीर्तिमान स्थापित हुआ है। महिलाओं ने खेलों के माध्यम से जेंडर इक्वालिटी का प्रमुख उद्धहरण दिया है। सरकार ने भी महिलाओं को खेलो में आगे बढ़ाने के लिए विशेष कदम उठाए हैं। पिछले वर्ष खेलो इंडिया वूमेन लीग का आयोजन कराया गया लगभग हर बड़े खेल में और इसमें डेढ़ लाख से भी अधिक महिला एथलीट्स ने भाग लिया। उनको प्रतियोगिता का अनुभव दिलाना सबसे मुख्य कदम था। इससे उनको आत्मविश्वास प्राप्त हुआ। पीवी सिंधु, मीराबाई चानू, निखत जरीन, लव बॉरगोहैन ने नई पीढ़ी की लड़कियों को अपने प्रदर्शन से बेहद प्रभावित किया है और सरकार उनकी हर तरह से सहायता करेगी।
    • पेरिस ओलंपिक्स के लिए तैयारी किस स्तर की है?
    पेरिस ओलंपिक्स के लिए खिलाड़ियों की ट्रेनिंग पिछले 2 वर्षों से जारी है और वह अच्छे स्तर की हो रही है। हमने 3 नेशनल सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस की सुविधाएं उन्नत करी हैं – पटियाला, बेंगलुरु और लखनऊ में – जहां पर खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिलेंगी। 200 विशेषज्ञ जैसे हाई परफोर्मेंस मैनेजर्स और हाई परफोर्मेंस डायरेक्टर्स भी नियुक्त किए गए हैं जो ट्रेनिंग में और निखार ले आयेंगे। हर एथलीट को टॉप्स योजना से सहायता मिलती रहेगी।
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