सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्ट (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989) को लेकर एक अहम और दूरगामी असर वाला फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ कहा है कि सिर्फ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल अपने आप में SC/ST एक्ट के तहत अपराध नहीं बनता, जब तक यह साबित न हो कि अपमान जातिगत पहचान के कारण और जानबूझकर किया गया हो।
यह फैसला SC/ST एक्ट की धारा 3(1) की व्याख्या के लिहाज से मील का पत्थर (Milestone Judgment) माना जा रहा है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने स्पष्ट किया कि:
- SC/ST Act के तहत आपराधिक कार्रवाई तभी संभव है, जब
- पीड़ित व्यक्ति SC/ST समुदाय से हो
- और आरोपी का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ जाति के आधार पर अपमान या धमकी देना हो
कोर्ट ने कहा कि केवल गाली-गलौज या अपशब्दों का प्रयोग, यदि वह व्यक्तिगत विवाद के दौरान हुआ हो, तो उसे स्वतः जातिगत अत्याचार नहीं माना जा सकता।
❓ हर अपशब्द SC/ST एक्ट क्यों नहीं?
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार:
- कई मामलों में आपसी झगड़े, मारपीट या विवाद के दौरान लोग आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कर देते हैं
- लेकिन हर अपमानजनक शब्द को जातिगत अत्याचार की श्रेणी में नहीं डाला जा सकता
- इसके लिए जाति के आधार पर अपमान करने की मंशा (Intention) का स्पष्ट होना जरूरी है

