सुप्रीम कोर्ट ने अमन श्रीवास्तव, उसके परिवार और गैंग से जुड़े 19 लोगों के खिलाफ UAPA के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति को रद्द कर दिया है. इस फैसले के बाद एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (ATS) रांची द्वारा दर्ज कांड संख्या 1/2022 में अब आरोपियों पर सिर्फ IPC/BNS की धाराओं के तहत ही ट्रायल चलेगा. यह आदेश विनोद पांडे की ओर से दायर अपील पर सुनवाई के बाद दिया गया.
गौरतलब है कि ATS रांची ने अमन श्रीवास्तव गैंग पर रंगदारी वसूली और दहशत फैलाने के आरोप में मामला दर्ज किया था. इसमें विनोद पांडे को गैंग का सदस्य बताया गया था. छापेमारी के दौरान विनोद पांडे के पास से 5.42 लाख रुपये और सिद्धार्थ साहू के पास से 28.55 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे. इसी आधार पर अमन श्रीवास्तव समेत 19 लोगों के खिलाफ UAPA के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
मामले में राज्य सरकार ने उपायुक्त के अनुरोध पर तीसरी बार UAPA की धाराओं 16, 17, 18, 20 और 21 के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी. इससे पहले दो बार सरकार ने ठोस सबूतों के अभाव में अनुमति देने से इनकार कर दिया था. विनोद पांडे ने इस आदेश को पहले हाईकोर्ट में चुनौती दी, जहां याचिका खारिज हो गई. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि तीसरी बार भेजे गए प्रस्ताव में कोई नया या ठोस तथ्य नहीं था. राज्य सरकार के वकील ने भी इसे स्वीकार किया. कोर्ट ने कहा कि बिना नए साक्ष्य के UAPA के तहत मुकदमे की अनुमति देना कानूनसम्मत नहीं है. इसी आधार पर UAPA के तहत मुकदमा चलाने का आदेश रद्द कर दिया गया और स्पष्ट किया गया कि अब ATS का मामला IPC/BNS के तहत ही आगे बढ़ेगा.

