झारखंड के हजारीबाग जिले से एक रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। चरही थाना क्षेत्र के घाटों मोड़ पर शनिवार की सुबह एक अनियंत्रित ट्रेलर ‘यमराज’ बनकर सड़कों पर उतरा और देखते ही देखते तबाही का मंजर पैदा कर दिया। इस बेकाबू वाहन ने न केवल बस और टेंपो को अपनी चपेट में लिया, बल्कि सड़क किनारे रोजी-रोटी कमा रहे एक निर्दोष युवक की जान भी ले ली। हादसे के बाद मौके पर मची चीख-पुकार और बिखरे हुए वाहनों के मलबे ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है।
ट्रेलर का कहर: बस, टेंपो और दुकानें सब बर्बाद
हादसा इतना भीषण था कि ट्रेलर जिस ओर मुड़ा, वहां केवल बर्बादी के निशान ही बचे।
- शृंखलाबद्ध टक्कर: बेकाबू ट्रेलर ने सबसे पहले सड़क पर चल रहे एक टेंपो को जोरदार टक्कर मारी। इसके बाद वह हजारीबाग की ओर जा रही सागर बस से जा भिड़ा।
- दुकान में घुसा वाहन: ट्रेलर यहीं नहीं रुका, उसने किनारे खड़ी एक 407 गाड़ी को ठोकर मारते हुए सीधे फल और पान की गुमटी को रौंद दिया।
- मलबे में दबी जिंदगी: फल की दुकान पर काम कर रहे उदय सिंह (27), पिता सूरज सिंह, अनियंत्रित ट्रेलर के पहियों के नीचे दब गए। स्थानीय लोगों ने उन्हें बाहर निकालने की भरसक कोशिश की, लेकिन भारी वाहन के नीचे दबने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
राहत और बचाव: अस्पताल में जिंदगी की जंग
घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों और चरही थाना पुलिस ने मोर्चा संभाला।
- घायलों का रेस्क्यू: हादसे में 5 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्हें तत्काल एम्बुलेंस के जरिए शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल, हजारीबाग भेजा गया है, जहाँ उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
- यात्रियों की व्यवस्था: सागर बस में सवार यात्री बाल-बाल बच गए, लेकिन बस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। पुलिस ने यात्रियों को दूसरी बसों के जरिए उनके गंतव्य तक रवाना किया।
- जाम से राहत: पुलिस ने क्रेन की मदद से दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाकर यातायात बहाल कराया।
हजारीबाग के ‘डेथ जोन‘ और पुराने हादसे
हजारीबाग का चरही घाटी क्षेत्र और घाटों मोड़ ऐतिहासिक रूप से सड़क हादसों के लिए कुख्यात रहा है।
- खतरनाक बनावट:हजारीबाग से गुजरने वाला यह नेशनल हाईवे (NH-33) ढलानों और तीखे मोड़ों के लिए जाना जाता है। इतिहास गवाह है कि यहाँ ब्रेक फेल होने या नींद की झपकी के कारण दर्जनों बड़े ट्रेलर हादसे हुए हैं।
- अतीत के जख्म:पिछले एक दशक में चरही और इचाक के पास कई यात्री बसें इसी तरह बेकाबू ट्रकों का शिकार बनी हैं। प्रशासन ने कई बार ‘स्पीड ब्रेकर’ और ‘चेतावनी बोर्ड’ लगाए, लेकिन भारी वाहनों की अनियंत्रित रफ्तार इस ऐतिहासिक मार्ग पर हमेशा से एक बड़ा खतरा बनी रही है। उदय सिंह की मौत ने एक बार फिर इन सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है।
पुलिस की कार्रवाई: दोषियों पर होगी नकेल
चरही थाना प्रभारी कुंदन कांत विमल ने बताया कि पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है।
- जांच शुरू:पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या ट्रेलर का ब्रेक फेल हुआ था या चालक नशे की हालत में था।
- सख्त कदम:पुलिस ने ट्रेलर को जब्त कर लिया है और फरार चालक की तलाश की जा रही है। थाना प्रभारी ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
हजारीबाग की यह घटना एक बार फिर सड़कों पर सुरक्षा की कमी को उजागर करती है। एक 27 साल का युवक, जो अपनी दुकान पर रोजी-रोटी कमा रहा था, सिस्टम की लापरवाही का शिकार हो गया। जब तक सड़कों पर भारी वाहनों की गति और फिटनेस की सख्त निगरानी नहीं होगी, तब तक घाटों मोड़ जैसे ‘ब्लैक स्पॉट्स’ पर मासूमों की जान जाती रहेगी।

