मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर दबाव के बीच केंद्र की तरफ से बड़ा कदम उठाया गया है. पेट्रोलियम मिनिस्ट्री ने मंगलवार को एसेंशियल कमोडिटी एक्ट, 1955 (Essential Commodities Act, EC Act) को लागू कर दिया है. इस एक्ट का मकसद कुकिंग गैस और व्हीकल गैस की सप्लाई को बिना किसी रुकावट के जारी रखना है.
सरकार ने गैस सप्लाई को तय करने के लिए भी बड़ा फैसला किया है. सरकार ने देश की सभी तेल रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को निर्देश दिया गया है कि वे एलपीजी (LPG) का प्रोडक्शन ज्यादा से ज्यादा करें और प्रमुख हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स (प्रोपेन और ब्यूटेन) को एलपीजी पूल में डायवर्ट करें.
सरकार ने यह कदम करोड़ों घरों में रसोई गैस की सप्लाई को बनाए रखने के लिए उठाया है. सरकार का पूरा जोर घरेलू कस्टमर के लिए गैस सप्लाई को पूरा करने पर है. आदेश के तहत एक्स्ट्रा प्रोडक्शन वाली एलपीजी को केवल घरेलू इस्तेमाल के लिए दिया जाएा. पब्लिक सेक्टर की तीनों तेल कंपनियां इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) का टारगेट इसे ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने का है. मंत्रालय की तरफ से X पर पोस्ट करके कहा गया, ‘मौजूदा जियो-पॉलिटिकल टेंशन और एलपीजी सप्लाई की कमी को देखते हुए रिफाइनरियों को ज्यादा प्रोडक्शन और घरेलू इस्तेमाल के लिए गैस उत्पादित करने का आदेश दिया गया है.
क्या है EC एक्ट?
एसेंशियल कमोडिटी एक्ट, 1955 (Essential Commodities Act) यानी EC Act भारतीय कानून है. इसे पेट्रोल, डीजल, खाद्य तेल, अनाज और दवाओं जैसे जरूरी सामान की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए लागू किया जाता है. इसका मकसद इन सामान की सप्लाई को सुचारू रखना है. सरकार इसके तहत स्टॉक लिमिट तय करती है. इसके उल्लंघन पर 3 महीने से लेकर 7 साल तक की जेल हो सकती है.
EC एक्ट का मकसद
EC एक्ट (ECA) का मकसद जरूरी वस्तुओं की कमी को रोकना, कालाबाजारी पर लगाम लगाना और उचित दाम पर सामान उपलब्ध कराना है. इस कानून के तहत केंद्र सरकार को किसी भी जरूरी वस्तु के प्रोडक्शन, सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन को कंट्रोल करने का अधिकार होता है. किसी सामान की कीमत बढ़ने पर सरकार की तरफ से व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की लिमिट तकय कर सकती है. इसके तहत खाद्य पदार्थ, ईंधन (पेट्रोल, डीजल), दवा, बीज, उर्वरक और मास्क आदि प्रोडक्ट आते हैं.
कैसे काम करता है ESMA?
ESMA और राज्य सरकार और केंद्र सरकार की तरफ से लागू किया जाता है. इसके लागू होने के बाद संबंधित फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने की मनाही होती है. इस दौरान यदि किसी ने हड़ताल की तो उस कर्मचारी को छह महीने तक की सजा हो सकती है. इसे लागू करने से पहले कर्मचारियों को न्यूज पेपर या अन्य किसी माध्यम के जरिये सूचना दी जाती है.
एसेंशियल कमोडिटी एक्ट, 1955 का सेक्शन 3 सरकार को जरूरी वस्तुओं के प्रोडक्शन, सप्लाई, डिस्ट्रीब्यूशन आदि को कंट्रोल करने का अधिकार देती है. जरूरी वस्तुओं के अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर सेक्शन 7 के तहत दंडित करने का भी जिक्र किया गया है. यानी सरकार इस कानून के जरिये कुछ परिस्थितियों में जरूरी सामान के भंडारण पर रोक लगाती है. कई बार सरकार की तरफ से गेहूं के भंडारण पर रोक लगाई जाती है.

