गिरिडीह के बगोदर इलाके के पोचरी गांव के रहने वाले कोलेश्वर महतो की मौत अफ्रीकी देश इथोपिया में हो गई थी। 17 दिनों के लंबे इंतजार के बाद शव गुरुवार को घर पहुंचा। इसके बाद पूरे गांव में मातम पसर गया। परिवार के लोगों का रो-रो कर बुरा हाल था। पति का शव देखकर पत्नी बेहोश हो गई थीं। गत 10 जनवरी 2022 को इथोपिया में काम करने के दौरान हुई दुर्घटना में श्रमिक की मौत हो गई थी। वह टाटा पावर ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में कार्यरत था। शव पहुंचने के बाद परिवार की ओर से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
कंपनी की ओर से पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है। इसके अलावा परिवार की भावनाओं को ध्यान में रखकर शव को विदेश से स्वदेश पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी की गई । दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद से पीड़ित परिवार सदमे में थे। परिवार ने कंपनी अधिकारियों से मांग रखी थी कि यथाशीघ्र शव गांव लाया जाएगा। शव के इंतजार में परिवार के लोगों का एक-एक दिन काटना मुश्किल हो रहा था। बुधवार की शाम शव फ्लाइट से रांची पहुंचा। इसके बाद इसे गिरिडीह रवाना किया गया।
शव देखने के लिए जुटी लोगों की भीड़
कर्मचारी का शव देखने के लिए गांव में लोगों की भीड़ एकत्र हो गई। लोगों ने परिवार को सांत्वना दी। लोगों का कहना था कि 17 दिनों के इंतजार के बाद वतन की मिट्टी मिलना बहुत कम लोगों के भाग्य में होता है। गांव के लोगों ने बताया कि मरने वाले शख्स बेहद मिलनसार प्रवृत्ति का व्यक्ति थी। गांव के लोगों के सुख-दुख में अपनी क्षमता के अनुसार मदद करता था।

