रांची: तमाड़ वन क्षेत्र के सारजमडीह टोला चिरूपीडी जंगल में हाथी के एक बच्चे ने दम तोड़ दिया। ग्रामीणों के मुताबिक वह सात-आठ दिनों से बीमार था। उन्होंने इसकी सूचना तमाड़ वन क्षेत्र पदाधिकारी अमरनाथ भगत को दी। सूचना पाते ही भगत डॉक्टर की सहायता से हाथी के बच्चे को किसी तरह केले में दवा डालकर खिलाने की कोशिश की। लेकिन उसने दवा नहीं खाया।
वहीं, हाथी के बच्चे को चारों ओर से हाथियों के झुंड ने घेर रखा था। जिससे उसके इलाज में काफी परेशानी आई। ग्रामीणों ने बताया कि नन्हें हाथी के चारो ओर करीब 12 से 15 जंगली हाथी घेरा बनाकर खड़े थे। इधर, मौत के बाद वाइल्ड चिकित्सक डॉ जयकुमार तिवारी और महिमा मिंज ने हाथी के बच्चे का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद उसके शव को दफनाया गया।
बता दें कि तमाड़, बुंडू, सोनाहातू ,अनगड़ा, सिल्ली, राहे आदि इलाकों में आए दिन हाथी आतंक मचाते रहते हैं। ग्रामीण हमेशा इनके भय से भयभीत रहते हैं। शाम होते -होते लोग अपने -अपने घरों में दुबकने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है पहले ढोल, नगाड़ा, बम, फटाके, मशाल आदि से डरकर हाथी भाग जाते थे। लेकिन अब ये नहीं भागते।
तमाड़ वन क्षेत्र में 5 वर्षों में लगभग दो दर्जन लोगों को मार चुके हैं हाथी
तमाड़ वन क्षेत्र में 5 वर्षों में लगभग दो दर्जन लोगों को हाथी मौत के घाट उतार चुके हैं। आए दिन हाथियों के द्वारा लोगों को कुचले जाने की खबरें सामने आती रहती है। ग्रामीणों की मानें तो दलमा से आये हाथियों का दल से अधिक सारकेला की ओर से हाथी हिंसक होते हैं। दलमा के हाथी लंबे होते है। जबकि सराईकेला कि ओर आए जंगली हाथियां कद में छोटे होते है पर काफी हिंसक होते हैं।

