रांची: धनबाद के जज उत्तम आनंद हत्याकांड मामले में शुक्रवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ऑटो के धक्के से ही जज की मौत हुई है। षड्यंत्र और मोटिव की जानकारी रिपोर्ट में नहीं है। इस पर जांच की बात कही गयी है।अदालत ने दोनों आरोपितों को पर्याप्त सुरक्षा देने को कहा है। कोर्ट का अंदेशा है अगर कोई बड़ा षडयंत्र हुआ तो उनपर हमला हो सकता है। अदालत ने उन्हें हवाई जहाज से ही ले जाने और लाने को कहा है। इस दौरान गृह सचिव और एफएसएल के निदेशक कोर्ट में हाजिर हुए। कोर्ट ने उनसे कहा कि राज्य जब एक ही एफएसएल लैब है तो इसमें जरूरी जांच को सुविधा होनी जरूरी है। अदालत निदेशक को इस बात की जानकारी कोर्ट को देने को कहा कि लैब के कितने पद रिक्त है और क्या क्या नई जांच की सुविधा की जरूरत है। अगली सुनवाई को दोनों अधिकारी कोर्ट हाजिर रहेंगे। इससे पहले गत 19 अगस्त को इस मामले की सुनवाई हुई। इसमें अदालत ने कहा कि रांची एफएसएल में जांच की सुविधा न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। कोर्ट ने सीबीआइ की ओर से रिपोर्ट पर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि सीबीआई को ऑटो और जज से हुई टक्कर की जगह की जांच रिपोर्ट देनी चाहिए, ताकि यह पता चल पाए की जज की मौत टक्कर से हुई है या फिर किसी ने मारा है। क्योंकि फुटेज में चालक के पास बैठे व्यक्ति ने मारा है और कोर्ट प्रथम दृष्टया ऐसा मान रही है। कोर्ट ने कहा कि पीएम रिपोर्ट में जज के सिर के दाहिने हिस्से में डेढ़ इंच का घाव है, जो ऑटो के साइड मिरर से नहीं हो सकता है। सीबीआई को इसपर भी जांच करनी चाहिए। बता दें कि यह मामला चीफ जस्टिस डा रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। सुनवाई के दौरान कोर्ट के आदेश के आलोक में सीबीआइ की ओर से जांच रिपोर्ट दी गई। इस दौरान इस मामले की जांच करने वाले अधिकारी भी कोर्ट में आनलाइन जुड़ें।इससे पहले इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अनुसंधान अधिकारी से कई सवाल पूछे थे, जिनका वे सटीक जवाब नहीं दे पाए थे। उनका कहना था कि घटना की रिक्रिएशन और ऑटो की फारेंसिंक जांच की रिपोर्ट अभी तक नही आई है। इस पर अदालत सीबीआइ से जांच रिपोर्ट में हत्या के मोटिव सहित अन्य बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। ताकि जांच रिपोर्ट की समीक्षा की जा सके।
अदालत ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने उन पर भरोसा जताते हुए इस मामले के जांच की प्रत्येक सप्ताह समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी है, सटीक रिपोर्ट होने पर ही कोर्ट इसकी समीक्षा कर पाएगी। अदालत ने यह भी कहा था कि सीबीआइ की क्षमता पर उन्हें पूरा भरोसा है इसलिए जांच की प्रगति रिपोर्ट हर सप्ताह अदालत में सीलबंद लिफाफे में सौंपी जाए। सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच पदाधिकारी को सुझाव दिया था जज और ऑटो की टक्कर के स्थान पर खून, बाल या चमड़े की फारेंसिंक रिपोर्ट से जांच में सहायता मिलेगी।
वहीं, घटना के समय उस रास्ते से गुजरने वाले बाइक सवार को चिन्हित कर पूछताछ भी की जानी चाहिए। बता दें कि जज उत्तम आनंद जब मार्निंग वाक कर रहे थे, इसी दौरान एक ऑटो उन्हें पीछे टक्कर मारकर फरार हो गया। इस घटना की सीसीटीवी फुटेज वायरल होने के बाद हत्या किए जाने की आशंका व्यक्त करते हुए इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी उठाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए न्यायिक पदाधिकारियों की सुरक्षा पर चिंता जताई और सभी राज्यों को नोटिस जारी कर न्यायिक पदाधिकारियों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी।

