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    Home»झारखण्ड»डीवीसी विभाग की बड़ी लापरवाही, एलटी डीबी बॉक्स को छोड़ दिया खुला, हो सकती है बड़ी दुर्घटना
    झारखण्ड

    डीवीसी विभाग की बड़ी लापरवाही, एलटी डीबी बॉक्स को छोड़ दिया खुला, हो सकती है बड़ी दुर्घटना

    Koylanchal SamvadBy Koylanchal SamvadJuly 11, 2022No Comments4 Mins Read
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    जमशेदपुर : झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड टाटा स्टील कंपनी लीज शेत्र के बाहर बिजली की आपूर्ति करती है। मगर इन दिनों कदमा उलियान अनिल सुर पथ सबस्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। जिसके तहत कदमा भाटिया बस्ती गोस्वामी पथ रोहिणी कांपलेक्स के पास स्थित ट्रांसफार्मर के नीचे लगा एलटी डीबी बॉक्स का ढक्कन खुला हुआ है। यह बॉक्स ऐसी जगह पर लगा हुआ है। जहां अपार्टमेंट के बच्चे समेत बस्ती के बच्चे खेलते हैं। वहीं इस बॉक्स को बड़ी आसानी से बच्चे या फिर क्षेत्र में घूमने वाले जानवर छू सकते हैं। जिससे कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना कर सकती है। मगर विभाग को इससे कोई लेना-देना नहीं है। महीनों से यह बॉक्स खुला पड़ा हुआ है। जिसके कारण कभी भी जानमाल का भारी नुकसान हो सकता है। कदमा और सोनारी में लगभग 270 एलटी डीबी बॉक्स है। जिनमें से अगर अपार्टमेंट्स के पास वाले डीबी बॉक्स को छोड़ दे तो अधिकतर खराब है।

    इन बॉक्स से डायरेक्ट लाइन काटकर मानव दिवस कर्मी एलटी लाइन पर काम करते हैं। वहीं इनके खराब होने पर उन्हें ट्रांसफार्मर के बगल में लगे लोहे के हैंडल से लाइन काटनी पड़ती है। जिससे हमेशा हादसे का डर बना रहता है। सिर्फ इतना ही नहीं, झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के अंतर्गत काम करने वाले मानव दिवस कर्मियों का भी हाल बुरा है। जो मानव दिवस कर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर हमें निरंतर बिजली आपूर्ति करवाते हैं, उन्हें मिलने वाली सुविधा तक नहीं दी जा रही है। आए दिन काम के दौरान मानव दिवस कर्मियों के साथ होने वाले हादसे की खबर भी आती रहती है और जिसमें उनकी जान भी चली जाती है। वहीं रविवार सरायकेला हुदू पंचायत अंतर्गत कुनामाचा गांव में पोल पर चढ़कर काम करने के दौरान करंट की चपेट में आकर राहुल बेज नामक बिजली मिस्त्री की मौत हो गई। जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि मिस्त्री शटडाउन लेकर काम कर रहा था। मगर किसी ने बिजली चालू कर दी। जिससे करंट लगने से उसकी मौत हो गई। मामले से ग्रामीणों में आक्रोश है और वे मुआवजे की मांग कर रहे हैं। साथ ही मामले की सूचना कांड्रा थाने में भी दे दी गई है। जबकि इससे पूर्व राजनगर में भी करंट की चपेट में आकर एक मानव दिवस कर्मी की मौत हो गई थी। जान जोखिम में डालकर काम करने वाले इन कर्मियों को विभाग की तरफ से उचित अधिकार भी नहीं दिया जाता है। साल में 4 राष्ट्रीय दिवस जिसमें गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, गांधी जयंती और मजदूर दिवस शामिल है, की छुट्टी भी नहीं दी जाती है। साथ ही 4 त्यौहार जैसे दुर्गा पूजा, होली, क्रिसमस और ईद की भी छुट्टी नहीं दी जाती है। छुट्टी के दिनों में भी इनसे काम लिया जाता है। नियमत: छुट्टी के दिन काम करने पर उन्हें विभाग की तरफ से पैसे दिए जाने चाहिए। मगर काम के एवज में चाईबासा, चक्रधरपुर, सरायकेला, मानगो, करनडीह, घाटशिला और आदित्यपुर इन सातों डिवीजन के मानव दिवस कर्मियों को कुछ भी नहीं दिया जाता है। विगत वर्ष 2017 से ही इन्हें छुट्टी नहीं मिल रही है। जिसको लेकर मानव दिवस कर्मियों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास को पत्राचार कर मामले से अवगत कराया था। साथ ही हड़ताल पर बैठे मानव दिवस कर्मियों को विपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने भी सरकार बनने के बाद उनकी समस्याओं पर पहल करने की बात कही थी। 2017 से पहले बिजली बोर्ड के द्वारा मानव दिवस कर्मियों को वेतन भुगतान किया जाता था। मगर 2017 से ठेकेदार के द्वारा इन्हें वेतन दिया जा रहा है और जो आज तक निरंतर जारी है। जबकि मामले को लेकर मानव दिवस कर्मियों ने श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता को भी प्रचार पत्राचार किया है। वहीं हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनने के बाद मानव दिवस कर्मी उनसे दुमका में मिले। जिसके बाद उन्होंने अपने आप्त सचिव सुनील कुमार श्रीवास्तव को जांचोपरांत बिजली बोर्ड को पत्र निर्गत करने को कहा। मगर तब तक कोरोना महामारी राज्य में प्रवेश कर चुका था। जिसके कारण मामला अब तक अधर में लटका हुआ है। चाईबासा, चक्रधरपुर, सरायकेला, मानगो और करनडीह डिवीजन के मानव दिवस कर्मियों को वर्ष 2020 तक एरियर का भुगतान किया गया है। इसके विपरीत घाटशिला और आदित्यपुर डिवीजन के कर्मियों को अब तक एरियर का भुगतान ही नहीं किया गया है। जो अपनी जान जोखिम में डालकर हमें बिजली जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराते हैं, उन मानव दिवस कर्मियों का हाल बहुत बुरा है। मामले में जब हमने विभाग के जीएम श्रवण कुमार से बात की तो उन्होंने खराब पड़े एलटी डीबी बॉक्स को जल्द मरम्मत करने के साथ-साथ सभी खुले हुए बॉक्स पर ढक्कन लगाने का आदेश अधिकारियों को दिया। जबकि आने मामलों के लिए मिलकर बताने को कहा। अब आगे देखना यह है कि कब तक बिजली विभाग की नींद खुलती है और वे अपनी लापरवाही को दुरुस्त करते है।

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