रांची: मरांग गोमके जयपाल सिंह मुण्डा की 119वीं जयंती पर राज्य भर में उन्हें याद किया. विशेष कर रांची से लेकर सिमडेगा, दुमका तक खेल प्रेमियों ने खेल के क्षेत्र में उनके योगदान को सराहनीय और अनुकरणीय बताया.
जयंती के मौके पर सोमवार को खेलकूद युवा कार्य निदेशालय, झारखंड के निदेशक जीशान कमर ने कचहरी चौक के समीप स्थित जयपाल सिंह स्टेडियम में खेल प्रेमियों ने उन्हें याद किया. उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प गुच्छ अर्पित किया.
इसके बाद मोरहाबादी (रांची) स्थित मरांग गोमके जयपाल सिंह एस्ट्रोटर्फ हॉकी स्टेडियम का निरीक्षण भी किया. स्टेडियम में हो रहे कार्य एवं लगाये जा रहे एस्ट्रोटर्फ के कार्य की जांच की. साइट इंचार्ज विस्तृत जानकारी ली. निर्देश दिया कि जल्द से जल्द कार्य को पूरा करें.
स्टेडियम में हो रहे कार्य के अलावा खिलाड़ियों के ठहरने, चेंजिंग रूम, पवेलियन, स्क्रीन स्कोर बोर्ड एवं फ्लैशलाइट की स्थिति के बारे में भी जानकारी ली. मौके पर हॉकी झारखंड के अध्यक्ष भोला नाथ सिंह, महासचिव विजय शंकर सिंह एवं CEO रजनीश कुमार भी उपस्थित थे.
ऑक्सफोर्ड ब्लू’ का खिताब पाने वाले एकमात्र अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
सिमडेगा में हॉकी सिमडेगा ने खिलाड़ियों के साथ मिलकर जयपाल सिंह के योगदान को याद किया. गोंडवाना खेल छात्रावास के प्रांगण में हॉकी, फुटबॉल एवं तीरंदाजी खिलाड़ियों ने सामूहिक रूप से उन्हें पुष्पांजलि देकर अपनी श्रद्धा सुमन अर्पित की.
हॉकी सिमडेगा के प्रमुख मनोज कोनबेगी ने मौके पर कहा कि जयपाल सिंह ने 1928 के ओलंपिक में देश को स्वर्ण पदक दिलाया था. विजेता भारतीय हॉकी टीम के वे कैप्टन भी थे.
महान हॉकी खिलाड़ी जयपाल सिंह मुंडा भारतीय आदिवासियों और झारखंड आंदोलन के भी एक सर्वोच्च नेता थे. वे एक जाने माने राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, संपादक, शिक्षाविद् और 1925 में ‘ऑक्सफोर्ड ब्लू’ का खिताब पाने वाले हॉकी के एकमात्र अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी थे.
वे विदेशो के विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के साथ झारखंड के खूंटी लोकसभा क्षेत्र से स्वतंत्र भारत के प्रथम सांसद चुने गये थे. इस क्षेत्र से वे लगातार तीन बार सांसद रहे.
जनवरी 1938 जनवरी में उन्होंने आदिवासी महासभा की अध्यक्षता की जिसने बिहार से इतर एक अलग झारखंड राज्य की स्थापना की मांग की. इसके बाद जयपाल सिंह देश में आदिवासियों के अधिकारों की आवाज बन गये थे.

