राज्यपाल रमेश बैस ने आज हूल दिवस के अवसर पर राज भवन में हूल क्रान्ति के महानायक सिदो-कान्हू के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
हूल दिवस पर राज्यपाल ने अपने संदेश में कहा- ‘‘ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह के प्रतीक ‘हूल दिवस’ पर सिदो-कान्हू, चांद-भरैव, फूलो-झानो समेत सभी वीर शहीदों को कोटिशः नमन। इनकी गौरव गाथाएं सदैव भावी पीढ़ियों को शोषण व अत्याचार के विरुद्ध आवाज बुलंद करने एवं मातृभूमि की सेवा के प्रति प्रेरित करती रहेंगी।
वही सिदो कान्हू पार्क में अमर शहीद की प्रतिमा पर झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन, राज्यसभा सांसद महुआ माजी, कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, पूर्व उपमुख्यमंत्री और आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो, कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की, विधायक शिल्पी नेहा तिर्की, राष्ट्रीय युवा शक्ति के उत्तम यादव, युवा राजद के रंजन यादव सहित बड़ी संख्या में नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सिदो कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया.झामुमो की नवविर्वाचित राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने कहा कि आज भी राज्य के साथ केंद्र नाइंसाफी कर रहा है, इसलिए एक और हुल क्रांति की जरूरत है.
वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री ने हुल क्रांति को याद करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की कि वह ऐसी व्यवस्था कराएं की शहीदों के वंशज सम्मान के साथ जीवन यापन कर सकें. आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने कहा कि इतिहासकारों ने हूल क्रांति के साथ न्याय नहीं किया है. इसलिए अब समय है कि हुल क्रांति को फिर से परिभाषित कर इतिहास में इसे जगह दी जाएं क्योंकि यह आजादी की पहली क्रांति थी जिसमें 20 हजार से ज्यादा लोगों ने एक साथ भाग लिया था.

