बिहार सरकार ने रोड एक्सीडेंट के शिकार लोगों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच तैयार किया है. अब रोड एक्सीडेंट के बाद शुरुआती कीमती समय यानी गोल्डन आवर में इलाज के लिए आपको अपनी जेब नहीं ढीली करनी होगी. उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक में जो बड़े ऐलान किए, वह आम लोगों की जान बचाने में मील का पत्थर साबित होंगे.
गोल्डन आवर में जान बचाने की पहल
सड़क दुर्घटनाओं में मौत का सबसे बड़ा कारण सही समय पर इलाज न मिलना होता है. इसे देखते हुए बिहार सरकार ने फैसला लिया है कि अब आपातकालीन ट्रॉमा सेंटरों में पीड़ितों का डेढ़ लाख रुपये तक का इलाज बिल्कुल मुफ्त किया जाएगा.
उपमुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि पैसे के अभाव में किसी भी घायल का इलाज नहीं रुकना चाहिए. गोल्डन आवर यानी हादसे के ठीक बाद का पहला घंटा, जिसमें जान बचने की सबसे अधिक संभावना होती है. अब सरकार की इस कैशलेस सुविधा के कारण और भी प्रभावी बनेगा. यह व्यवस्था राज्य के प्रमुख शहरों सहित सभी चिन्हित अस्पतालों में लागू की जाएगी.
स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट से दूर होगा जाम का झंझट
राजधानी पटना समेत बिहार के बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम एक बड़ी समस्या है. सरकार अब इसे पीपीपी (PPP) मोड पर इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए हल करने जा रही है. इस नई व्यवस्था के तहत सड़कों पर स्मार्ट निगरानी रखी जाएगी.
हाई-टेक कैमरों की मदद से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तकनीकी नजर होगी, जिससे सड़क अनुशासन बढ़ेगा और हादसों में कमी आएगी. इसके साथ ही दुर्घटनाओं का माइनर और मेजर श्रेणियों में विश्लेषण किया जाएगा, ताकि उन विशेष कारणों को खत्म किया जा सके जो बार-बार हादसों की वजह बनते हैं.
लापरवाही पर सख्त एक्शन
वाहन चलाने वालों के लिए भी अब नियम और प्रोत्साहन दोनों बदल रहे हैं. 1 मई से ट्रेनिंग लेने वाले चालकों को सरकार प्रोत्साहित करेगी. ट्रेनिंग प्राप्त करने वाले चालकों को 200 रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दिए जाएंगे.
भारी वाहन (HMV) चालकों के लिए सख्त चेतावनी दी गई है कि यदि वे तीन बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी ट्रेनिंग के लिए नहीं आते हैं, तो उन पर कड़ी कार्रवाई होगी. ड्राइवरों का एक जिला-वार ट्रैकिंग मॉड्यूल भी बनाया जा रहा है, जिससे विभाग के पास ट्रेंड ड्राइवरों का पूरा डेटाबेस मौजूद रहेगा.

